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हाईकोर्ट ने जताई चिंता कहा 11 साल में जाम से 990 करोड़ का ईंधन बर्बाद

Fri, 08 Apr 2016 06:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 Apr 2016 06:03 AM IST
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990 crores fuel waste in jaam from 11 years
- फोटो : अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली

हाईकोर्ट ने राजधानी में जाम और चौराहों पर सुस्त यातायात के चलते ईंधन के नुकसान में तेजी से हो रही बढ़ोतरी पर चिंता जाहिर की है। अदालत ने कहा कि पिछले 11 वर्षो में करीब 990 करोड़ रुपये का ईधन बर्बाद हो चुका है यह चिंता की बात है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र व दिल्ली सरकार को एक संयुक्त योजना पर काम करने का निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ राजधानी में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण मामले में सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान यातायात पुलिस ने अदालत को बताया कि 2005 से अब तक चौराहों और यातायात जाम के चलते राजधानी में करीब 990 करोड़ रुपये के ईंधन का नुकसान हुआ है।
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अदालत ने कहा कि यातायात पुलिस राजधानी में अपरिहार्य यातायात व्यवस्था से जूझने की कोशिश कर रही है, लेकिन इस मुद्दे पर अभी काफी कुछ करना बाकी है। अदालत ने यातायात पुलिस द्वारा दिल्ली में यातायात प्रबंधन पर दी गई प्रस्तुति पर गौर करने के बाद कहा कि यह सही है कि यातायात पुलिस इस मुद्दे पर काम कर रही है, लेकिन गुणवत्ता व प्रशिक्षित लोगों की कमी अभी इस मसले में बाधा बनी हुई है।

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यातायात को व्यवस्थित करने जैसे मुद्दे पर बड़े दृष्टिकोण की जरूरत है

990 crores fuel waste in jaam from 11 years

खंडपीठ ने कहा कि हमें बुनियादी ढांचे में निवेश और विकसित देशों की आधुनिक क्षमताओं के उपयोग से इस समस्या से निपटना होगा। अदालत ने पुलिसकर्मियों के लंबे समय तक ड्यूटी पर रहने पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि इससे तनाव, मनोवैज्ञानिक समस्या और काम में ध्यान की कमी आती है।

पुलिस को अपने सीमित संसाधनों के साथ ही चीजों को सूक्ष्म स्तर पर करना पड़ता है। लेकिन यातायात को व्यवस्थित करने जैसे मुद्दे पर बड़े दृष्टिकोण की जरूरत है और इसके लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को साथ आना होगा। यही दिल्ली में नागरिकों की सुरक्षा व वायु प्रदूषण के लिहाज से सही है।

अदालत ने गृहमंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया कि वह स्वयं या फिर उनके प्रतिनिधि इस मुद्दे पर सभी एजेंसियों के साथ बैठक करे। बैठक करने के बाद वह यातायात व्यवस्था के लिए किए जाने वालों काम, हर एक काम के लिए अलग से फंड आवंटित करने, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने के लिए समय-सारणी, यातायात व्यवस्था व आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर इस्तेमाल करने आदि मुद्दों पर रिपोर्ट तैयार कर दें। 

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