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Delhi NCR News: डीएमआरसी की चार लाइनों के 93 स्टेशनों का होगा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ऑडिट
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गुणवत्ता, पर्यावरण और सुरक्षा प्रबंधन के लिए के लिए होगा मूल्यांकन
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) अपनी रेड लाइन, ग्रीन लाइन, वायलेट लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के 93 स्टेशनों, छह डिपो और एक स्टेबलिंग लाइन का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मूल्यांकन कराएगा। प्रक्रिया के तहत गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन और व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े मानकों की जांच की जाएगी।
मूल्यांकन के दौरान स्टेशनों और डिपो पर संचालन व्यवस्था, रखरखाव, सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच होगी। इसके दायरे में ऑपरेशन, सिग्नलिंग, टेलीकॉम, सिविल, ट्रैक, लिफ्ट-एस्केलेटर, ट्रैक्शन, सुरक्षा, मानव संसाधन, स्टोर्स और पर्यावरण सहित विभिन्न विभाग शामिल रहेंगे।
पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले चरण में मौजूदा व्यवस्थाओं का आकलन कर कमियों की पहचान की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में सुधारों की समीक्षा के बाद प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद अगले दो वर्षों तक समय-समय पर निगरानी ऑडिट किए जाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी व्यवस्थाएं लगातार निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनी रहें। इस पहल का उद्देश्य मेट्रो संचालन में गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और कर्मचारियों व यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को और मजबूत करना है।
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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) अपनी रेड लाइन, ग्रीन लाइन, वायलेट लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के 93 स्टेशनों, छह डिपो और एक स्टेबलिंग लाइन का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मूल्यांकन कराएगा। प्रक्रिया के तहत गुणवत्ता प्रबंधन, पर्यावरण प्रबंधन और व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े मानकों की जांच की जाएगी।
मूल्यांकन के दौरान स्टेशनों और डिपो पर संचालन व्यवस्था, रखरखाव, सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच होगी। इसके दायरे में ऑपरेशन, सिग्नलिंग, टेलीकॉम, सिविल, ट्रैक, लिफ्ट-एस्केलेटर, ट्रैक्शन, सुरक्षा, मानव संसाधन, स्टोर्स और पर्यावरण सहित विभिन्न विभाग शामिल रहेंगे।
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पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले चरण में मौजूदा व्यवस्थाओं का आकलन कर कमियों की पहचान की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में सुधारों की समीक्षा के बाद प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद अगले दो वर्षों तक समय-समय पर निगरानी ऑडिट किए जाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी व्यवस्थाएं लगातार निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनी रहें। इस पहल का उद्देश्य मेट्रो संचालन में गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण और कर्मचारियों व यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को और मजबूत करना है।
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