ओबामा से पहले पहुंचा अवैध कारतूसों का जखीरा, हड़कंप
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव व गणतंत्र दिवस से पूर्व कारतूसों का जखीरा बरामद कर तीन बदमाशों को दबोचा है।
आरोपियों की पहचान इस्माइल नगर, मेरठ निवासी मोहम्मद शारिक (42), घोड़ा खाल रोड नैनीताल, उत्तराखंड निवासी फहीम मिया उर्फ बंटी (45) और रोटी गोदाम, सीतापुर निवासी मोहम्मद इमरान (32) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 1020 (9 एमएम, 7.65 एमएम और 12 बोर) कारतूस बरामद किए हैं।
पुलिस की मानें तो आरोपी दिल्ली-एनसीआर के बदमाशों के लिए कारतूसों का जखीरा सप्लाई करने वाले थे। चुनावों व गणतंत्र दिवस से पूर्व बदमाश इन कारतूसों का क्या करते पुलिस इसका पता लगाने का प्रयास कर रही है।
कार की तलाशी में निकले कारतूस
स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि 14 जनवरी को उनकी टीम को सूचना मिली थी कि दिल्ली-एनसीआर के बदमाशों को हथियार सप्लाई करने वाले बदमाश वेलकम मेट्रो स्टेशन के पास आने वाले हैं।
सूचना के बाद पुलिस ने मारुति ईको कार से शारिक व फहीम को दबोच लिया। कार की तलाशी लेने के बाद पुलिस को उससे 920 जिंदा कारतूस बरामद हुए।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि यह लोग सीतापुर से हथियार व कारतूस लाकर दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करते हैं।
इमरान के पास कहां से आए कारतूस?
15 जनवरी को पुलिस ने रोटी गोदाम, सीतापुर, यूपी से इमरान नामक युवक को दबोच लिया। पुलिस ने इसके पास से भी 100 कारतूस बरामद किए हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कारतूसों के इतने बड़ा जखीरा चुनावों व गणतंत्र दिवस से पूर्व मिलना इशारा करता है कि बदमाश राजधानी में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।
पुलिस बदमाशों से पूछताछ कर इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दिल्ली-एनसीआर में कारतूस किसको सप्लाई करने वाले थे। इसके अलावा इमरान सारे कारतूस कहां से लाया था।
धार के अवैध हथियार, यूपी के वैध कारतूस
बिहार के मुंगेर व मध्य प्रदेश धार के अवैध हथियार और इसके लिए वैध कारतूस...। जी हां सुनने में अजीब जरूर लगेगा, लेकिन यह हकीकत है।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों की मानें तो अवैध हथियारों का धंधा करने वाले लोगों के संबंध यूपी में लाइसेंसी हथियार बेचने वाले दुकानदारों से हैं।
ऐसे में यह दुकानदार ब्लैक में महंगे दामों पर बदमाशों को सरकारी कोटे के वैध कारतूस बेच देते हैं। इन कारतूसों को बदमाश और महंगा कर अन्य बदमाशों को बेच देते हैं।
कारतूस खरीदकर 300 से 400 रुपये में बेचते हैं आरोपी
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि बिहार के मुंगेर, मध्य प्रदेश के धार और खारगौन से बेहद उम्दा किस्म के हथियार तो आ जाते हैं, लेकिन उनके लिए कारतूस नहीं मिल पाते हैं।
पश्चिम उत्तर प्रदेश इन हथियारों के लिए कारतूसाें की डिमांड को पूरी करता है। पुलिस के मुताबिक यहां हथियारों के लाइसेंस धारक अपने सरकारी कोटे के कारतूस खर्च नहीं कर पाते हैं। जबकि हथियारों के विक्रेता के पास इनका कोटा हर साल आता है।
ऐसे में बदमाशों से सांठगांठ कर हथियार विक्रेता इन कारतूसों को महंगे दामाें पर बदमाशों को बेच देते हैं। बदमाश इन कारतूसों का इस्तेमाल दिल्ली-एनसीआर में अपराध बढ़ाने के लिए करते हैं।
शारिक पर 11 तो फहीम पर 16 आपराधिक मामले
पुलिस के मुताबिक मेरठ के रहने वाले शारिक ने अपने रिश्तेदार इमरान के जरिये हथियारों का काम शुरू किया था। इमरान पूर्वी उत्तर-प्रदेेश सेे हथियार लाकर बेचता था।
शारिक भी इसी के साथ धंधा कर रहा था। पुलिस के मुताबिक शारिक पर 11 अपराधिक केस दर्ज हैं। वहीं, फहीम के पिता पीडब्ल्यूडी में कार्यरत हैं। उसने छोटी उम्र सेे अपराध शुरू कर दिया था।
वह 16 हत्या, हत्या के प्रयास, ऑर्म्स एक्ट और लूटपाट के मामलों में शामिल रहा है। पुलिस की मानें तो फहीम मिया पीस पार्टी का नेता भी है। पुलिस उससे पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।