पीवीआर में चला आपत्तिजनक वीडियो, घेरे में सेंसर बोर्ड
दिल्ली में अगर आप किसी पीवीआर में सिनेमा देखने जाते हैं तो फिल्म से पहले आपको 90 सेकेंड की एक क्लिप दिखाई जाएगी जिसके कंटेंट को लेकर किसी को भी आपत्ती हो सकती है।
असल में इस वीडियो क्लिप को आतंकवाद के खिलाफ संदेश देने के लिए बनाया गया है। इसमें एक शख्स को दिखाया गया है जिसने काले और सफेद रंग की टोपी पहन रखी है। वहीं एक दूसरे शख्स को दिखाया जाता है जो तिरंगे के रंग की टोपी पहने हुए है।
सफेद-काली टोपी वाला शख्स तिरंगे रंग की टोपी पहने शख्स को इस बात के लिए प्रेरित करता है कि वह विस्फोटक पदार्थ को अपने पास छुपा ले। इसके बदले वह पैसे देने का लालच भी देता है।
इसमें एक को अच्छा मुसलमान बताया गया है जबकि दूसरे को बुरा मुसलमान। तिरंगे वाली टोपी पहना शख्स विस्फोटक रखने से इंकार कर देता है और देश प्रेम और सच्चे इस्लाम की बातें करता है।
अच्छे और बुरे मुसलमान पर विवाद
फिल्म के अंतिम दृश्य में सफेद काली टोपी वाले शख्स के हाथ में विस्फोटक से भरा पैकेट रह जाता है। आतंकवाद नाम के शीर्षक से बनी इस फिल्म को मुबंई के एक फिल्म निर्माता ब्रिज भूषण सिंह ने बनाया है।
हालांकि जब इस आपत्तिजनक क्लिप के बारे में पीवीआर पिक्चर्स के अध्यक्ष से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि किसी फिल्म को दिखाना है या नहीं इसका फैसला करने का अधिकार सेंसर बोर्ड को होता है। इस बारे में हम कोई फैसला नहीं करते।
जबकि फिल्म के डायरेक्टर का इस बारे में कहना है कि अगर देश में होने वाले बम विस्फोटों को देखा जाए तो उसमें से ज्यादा में मस्लिम समुदाय के लोग ही आरोपी हैं। फिल्मकार का कहना है कि उनका मकसद भारतीय मुसलमानों की एक सकारात्मक छवि पेश करने की है न कि उन्हें दोषी दिखाने की।
साभार: indianexpress.com