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Delhi NCR News: 80 साल पुरानी विरासत को मिलेगा नया स्वरूप, 20 करोड़ से बनेगा चार मंजिला आधुनिक विश्राम गृह
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- अंग्रेजों के दौर के ऐतिहासिक रेस्ट हाउस की जगह बनेगा अत्याधुनिक भवन, हजारों यादें इतिहास के पन्नों में सिमट जाएंगी।
शेर सिंह डागर
नूंह।
जिले के लोगों के लिए यह एक नई शुरुआत तो होगी, लेकिन इसके साथ ही नूंह की लगभग आठ दशक पुरानी एक ऐतिहासिक पहचान भी इतिहास का हिस्सा बन जाएगी। वर्ष 1946 में अंग्रेजों के शासनकाल के अंतिम दौर में बनाया गया विश्राम गृह अब अपनी जर्जर हालत के कारण विदा होने जा रहा है। इसकी जगह करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से चार मंजिला आधुनिक विश्राम गृह बनाया जाएगा। सरकार से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ड्राफ्ट डिजाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नया भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे जिले में आने वाले वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी मेहमानों को बेहतर आवासीय सुविधा मिल सकेगी।
- हजारों यादों का गवाह रहा यह रेस्ट हाउस : 1946 में जब यह विश्राम गृह बना था, तब नूंह पंजाब प्रांत के गुरुग्राम जिले का हिस्सा हुआ करता था। आजादी से पहले और उसके बाद दशकों तक यह भवन प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा। जिले के बुजुर्ग बताते हैं कि उस समय यह भवन इलाके की सबसे भव्य सरकारी इमारतों में गिना जाता था। मेवात क्षेत्र में जब भी कोई बड़ा अधिकारी दौरे पर आता, उसकी पहली मंजिल यही विश्राम गृह होता था। यहां अनेक जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक, मंत्री, मुख्यमंत्री, उपप्रधानमंत्री और राज्यपाल तक ठहर चुके हैं। कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकों, कानून-व्यवस्था की रणनीतियों और विकास योजनाओं की रूपरेखा भी इसी भवन में तैयार हुई।
- जिले के गठन से पहले भी रहा प्रशासन का केंद्र :
वर्ष 2005 में नूंह (तत्कालीन मेवात) जिला बनने के बाद भी यह विश्राम गृह प्रशासनिक गतिविधियों का अहम केंद्र बना रहा। जिला बनने के शुरुआती वर्षों में नए अधिकारियों की बैठकों, सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी ठहराव के लिए यही सबसे प्रमुख सरकारी भवन था। पुराने कर्मचारी बताते हैं कि कभी इस विश्राम गृह के बरामदों में अधिकारियों की बैठकों की चहल-पहल रहती थी। बड़े-बड़े पेड़ों की छांव में लोग घंटों बैठकर प्रशासनिक फैसलों का इंतजार करते थे। यहां आयोजित बैठकों से जिले के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय निकले।
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- 2024 में हुई थी घोषणा
मेवात दिवस-2024 के अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नए विश्राम गृह के निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने परियोजना तैयार कर सरकार को भेजी, जिसे अब प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है।
लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप कुमार ने बताया कि प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद विभाग डिजाइन और विस्तृत एस्टीमेट तैयार कर रहा है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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शेर सिंह डागर
नूंह।
जिले के लोगों के लिए यह एक नई शुरुआत तो होगी, लेकिन इसके साथ ही नूंह की लगभग आठ दशक पुरानी एक ऐतिहासिक पहचान भी इतिहास का हिस्सा बन जाएगी। वर्ष 1946 में अंग्रेजों के शासनकाल के अंतिम दौर में बनाया गया विश्राम गृह अब अपनी जर्जर हालत के कारण विदा होने जा रहा है। इसकी जगह करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से चार मंजिला आधुनिक विश्राम गृह बनाया जाएगा। सरकार से प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ड्राफ्ट डिजाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नया भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिससे जिले में आने वाले वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी मेहमानों को बेहतर आवासीय सुविधा मिल सकेगी।
- हजारों यादों का गवाह रहा यह रेस्ट हाउस : 1946 में जब यह विश्राम गृह बना था, तब नूंह पंजाब प्रांत के गुरुग्राम जिले का हिस्सा हुआ करता था। आजादी से पहले और उसके बाद दशकों तक यह भवन प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा। जिले के बुजुर्ग बताते हैं कि उस समय यह भवन इलाके की सबसे भव्य सरकारी इमारतों में गिना जाता था। मेवात क्षेत्र में जब भी कोई बड़ा अधिकारी दौरे पर आता, उसकी पहली मंजिल यही विश्राम गृह होता था। यहां अनेक जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक, मंत्री, मुख्यमंत्री, उपप्रधानमंत्री और राज्यपाल तक ठहर चुके हैं। कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठकों, कानून-व्यवस्था की रणनीतियों और विकास योजनाओं की रूपरेखा भी इसी भवन में तैयार हुई।
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- जिले के गठन से पहले भी रहा प्रशासन का केंद्र :
वर्ष 2005 में नूंह (तत्कालीन मेवात) जिला बनने के बाद भी यह विश्राम गृह प्रशासनिक गतिविधियों का अहम केंद्र बना रहा। जिला बनने के शुरुआती वर्षों में नए अधिकारियों की बैठकों, सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी ठहराव के लिए यही सबसे प्रमुख सरकारी भवन था। पुराने कर्मचारी बताते हैं कि कभी इस विश्राम गृह के बरामदों में अधिकारियों की बैठकों की चहल-पहल रहती थी। बड़े-बड़े पेड़ों की छांव में लोग घंटों बैठकर प्रशासनिक फैसलों का इंतजार करते थे। यहां आयोजित बैठकों से जिले के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय निकले।
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- 2024 में हुई थी घोषणा
मेवात दिवस-2024 के अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नए विश्राम गृह के निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने परियोजना तैयार कर सरकार को भेजी, जिसे अब प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है।
लोक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रदीप कुमार ने बताया कि प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद विभाग डिजाइन और विस्तृत एस्टीमेट तैयार कर रहा है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।