7.6 करोड़ भारतीय पीते हैं गंदा पानी, पड़ोसी देशों से भी बदतर हालात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनिया भर के देशों की तुलना में भारत के सबसे ज्यादा लोगों तक साफ-सुथरा पानी नहीं पहुंचता। करीब 7.6 करोड़ भारतीय गंदा पानी पी रहे हैं। इसके बाद चीन का नंबर आता है।
प्रमुख 10 देशों की सूची में बांग्लादेश का आठवां और पाकिस्तान का 10वां स्थान है। इसका खुलासा वॉटर एड नामक संस्था की रिपोर्ट में हुआ। विश्व जल दिवस के मौके पर मंगलवार को इसे महिला प्रेस क्लब में जारी किया गया। इस मौके पर यूनीसेफ इंडिया, इंडिया वास फोरम के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
रिपोर्ट बताती है कि इसकी बड़ी वजह स्वच्छ पेयजल का सरकारों की प्राथमिकता सूची में शामिल न होना है। वहीं, ज्यादातर देशों में जल प्रबंधन का कारगर ढांचा भी नहीं है।
इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में पाइप लाइन बिछाने की ठोस योजना नहीं है। इसका मिलाजुला असर खत्म होते प्राकृतिक जल स्रोतों पर आम लोगों की निर्भरता के तौर पर आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आबादी की तुलना में सबसे बुरी हालत पापुआ न्यूगिनी है। करीब 60 फीसदी लोग स्वच्छ पानी नहीं पाते। वहीं, दुनिया भर में भारत के सबसे ज्यादा लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिलता।
रिपोर्ट का मानना है कि कुप्रबंधन से भारत की हालत बदतर हुई है। मसलन, करीब 85 फीसदी पेयजल प्राकृतिक जल स्रोतों से मिलता है, लेकिन देश भर में भूजल का स्तर 56 फीसदी तक नीचे गिरा है।
इससे कई इलाकों में हैंडपंप सूख रहे हैं। वॉटर एड इंडिया के प्रोग्राम डायरेक्टर अवनीश कुमार के मुताबिक, देश की बढ़ती आबादी के बीच साफ-सुथरा पेयजल मुहैया कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। दुनिया भर में करीब 65 करोड़ लोगों को अभी भी स्वच्छ पेयजल नहीं मिलता।
15 सालों में कुछ देशों में हुआ सुधार
रिपोर्ट बीस ऐसे देशों का भी जिक्र करती है, जहां पिछले 15 सालों में पेयजल की सप्लाई में सुधार हुआ है। इस मामले में सबसे ऊपर कोलंबिया है। इस बीच यहां की सरकार ने करीब 33 फीसदी ज्यादा लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया। खास बात यह है कि इस सूची में भूटान, श्रीलंका, अफगानिस्तान आदि देश भी शामिल हैं। भूटान की पूरी आबादी को स्वच्छ पेयजल मिलता है, जबकि श्रीलंका में यह आंकड़ा 95 फीसदी है।