नोएडा आग हादसा: लापता लोगों के परिवार में फैला मातम, एनईए ने जताया दुख
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नोएडा के एक्सेल ग्रीनटेक कंपनी में आग लगने के बाद से कंपनी मालिक संजय दास, महिला अधिकारी जसमीत कौर, इंद्रभान सिंह, परीक्षित, विवेक कोचर और हितेश लापता बताए जा रहे हैं।
जिस वक्त कंपनी में आग लगी ये लोग चौथी मंजिल पर मौजूद थे। ऐसे में पुलिस व अग्निशमन अधिकारी आशंका जता रहे हैं कि चौथी मंजिल से जली हुई हालत में जो शव बरामद किए गए हैं, वो इन लापता लोगों के हो सकते हैं।
कंपनी में आग की सूचना मिलते ही लापता अधिकारियों के परिजन मौकेपर पहुंच गए। इन्होंने बिल्डिंग में लगी भयंकर आग को देख अपनों केबचे होने की उम्मीद छोड़ दी। इन लोगों के मोबाइल फोन नहीं मिल रहे थे। सूचना पाकर संजय दास की पत्नी नवीना भी कंपनी के बाहर पहुंची और काफी देर तक पति की खोज-खबर लेने के लिए इधर-उधर भटकती रहीं।
जसमीत ने मां को फोन कर मांगी मदद
जसमीत की मां रश्मिन्दर कौर ने बताया कि दोपहर करीब 1:30 बजे बेटी जसमीत का फोन आया था। वह बहुत घबराई हुई थी। उसने बताया कि कंपनी में आग लग गई है। वह लोग बार-बार अग्निशमन विभाग को फोन मिला रहे, लेकिन फोन नहीं मिल रहा।
जसमीत ने मां से अग्निशमन विभाग को फोन कर तुरंत सूचना देने के लिए कहा। रश्मिन्दर के अनुसार उनकी बेटी उस वक्त नीचे उतरने का प्रयास कर रही थी। जसमीत ने उन्हें बताया कि वह ऊपर फंसी है। नीचे आग लगी है, इसलिए वह बाहर नहीं निकल सकती। इसके बाद जसमीत वापस ऊपर की मंजिल पर लौट गई थी।
एसपी सिटी दिनेश यादव ने बताया कि मृतकों की पहचान संभव नहीं है, इसलिए जिला अस्पताल में उनके डीएनए टेस्ट के लिए नमूने लिए जा रहे हैं। मौत जलने से हुई है या दम घुटने से पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हो सकेगा। राहत व बचाव कार्य के लिए नोएडा के सभी थाना प्रभारी निरीक्षकों को फोर्स के साथ मौके पर बुला लिया गया था। इसके अलावा 108 नंबर की चार सरकारी एंबुलेंस चिकित्सकीय स्टॉफ के साथ मौके पर मौजूद थी। खबर लिखे जाने तक राहत व बचाव कार्य जारी था।
नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन ने हादसे पर जताया दुख
अग्नि शमन उपकरणों की अच्छी तरह से जांच करते रहें। एनईए के सभी सदस्यों को पत्र भेजकर कहा जाएगा कि फैक्टरी में आग से बचाव के सभी उपकरण लगवाएं और समय-समय पर दमकल विभाग से चेक भी कराते रहें। जितने कर्मचारी कंपनियों में काम करते हैं, उन्हें आग से बचाव के तरीके भी आने चाहिए। फैक्टरी का निर्माण इस तरह से करवाया जाए ताकि आग की घटना के वक्त निकलने के कई वैकल्पिक रास्ते भी होने चाहिए।
शासन और प्राधिकरण को लिखा जाएगा कि फैक्टरी क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से फैक्टरी मालिकों को तो दिक्कत होती ही है, साथ ही आग या कोई हादसा होने पर दमकल विभाग की गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में परेशानी होती है।