पटरी पर लौटा 50 फीसदी व्यापार, सेवा और उद्योग क्षेत्र अब भी पीछे
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कोरोना काल में दिल्ली ने भी लॉकडाउन और अनलॉक का दौर देखा है। इस बीच शुरुआत के करीब ढाई महीने सारी आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं तो बीते करीब ढाई महीने में बंदिशों के साथ काम आगे बढ़ रहा है। बेहद जरूरी वस्तुओं को छोड़कर दिल्ली के अर्थव्यवस्था के आधार माने जाने वाला उद्योग, व्यापार, कृषि और सेवा क्षेत्र ठप पड़ गया। तीनों क्षेत्रों के प्रतिनिधि स्वीकार करते हैं कि इस वक्त अनलॉक-3 में आकर अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगी है। कोरोना की वैक्सीन आने के बाद साल के आखिर तक अर्थव्यवस्था ठीक हो जाएगी। बीते पांच महीनों में अर्थव्यस्था के तीनों के क्षत्र के उतार-चढ़ाव की कहानी बताती अमर उजाला संवाददाता नवनीत शरण की रिपोर्ट।
व्यापारिक गतिविधिया: अनलॉक में 50 प्रतिशत व्यापार लौटा पटरी पर
अनलॉक-3 तक आते-आते व्यापार क्षेत्र को राहत मिली है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की दिल्ली ईकाई के महासचिव हेमंत गुप्ता ने बताया कि इस वक्त करीब 50 प्रतिशत व्यापार पटरी पर है। 90 प्रतिशत जीएसटी को दिल्ली सरकार पूरा कर रही है। इससे साफ है कि व्यापार पटरी पर लौट आया है। दिल्ली सरकार का जीएसटी एक लाख करोड़ का लक्ष्य है। गुप्ता ने बताया कि अक्तूबर तक 75 प्रतिशत आर्थिक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। कोरोना का खतरा टलने लगा है। डेंगू, चिकनगुनिया की तरह ही कोरोना होने पर भी लोग स्वस्थ्य होने लगे है। हालांकि खिलौना, कपड़ा समेत अन्य व्यापार में अभी भी दिक्कत है।
होटल व्यापार के लिए तो अब हुआ अनलॉक, इस साल उम्मीद नहीं
होटल व्यापार की दिल्ली की अर्थव्यवस्था में करीब 8 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। लेकिन इसका भविष्य अभी ठीक नहीं है। आमतौर पर अक्तूबर का महीना होटल कारोबार के लिए सबसे बेहतर होता है, लेकिन इस बार जब तक फ्लाइट, ट्रेन नहीं शुरू हो जाती तब तक यह व्यापार नहीं बढ़ेगा। इससे पहले लॉकडाउन के दौरान 10 हजार करोड़ रुपया का नुकसान हुआ है। सेवा सेक्टर से जुड़े दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर एसोसिएशन के महासचिव मोहित शाह ने बताया कि टोटल अनलॉक होने पर ही स्थिति बेहतर होगी। लॉकडाउन की अवधि में पूरे भारत में 90 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। दिल्ली में 8-10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सेवा क्षेत्र, टूर एंड ट्रेवल से जुड़े 4 लाख लोगों का रोजगार भी खत्म हो गया है।
लॉक व अनलॉक में मजदूर की कमी किसानों को सताती रही
कोरोना महामारी ने छोटे-बड़े सभी किसानों को मजदूर बनने को मजबूर किया। मजदूरों के पलायन के कारण लॉकडाउन के दौरान गेहूं की कटाई का काम करना पड़ा। हालांकि बुराड़ी के किसानों का कहना है कि बहुत कुछ खास असर नहीं पड़ा। क्योंकि सब्जियां खेतों में ही बिक जा रही थी तो मजदूर की जगह मशीन से खेती संभल गई।
भारतीय मजदूर किसान यूनियन व बुराड़ी के किसान विनोद त्यागी का कहना है कर बुराड़ी में 10 हजार बीघे में खेती होती है। लॉकडाउन व अनलॉक में सब्जियों का नुकसान नहीं हुआ। जो उगा रहे थे वह वही पर बेच भी रहे थे। हालांकि आजादपुर मंडी में सब्जी ले जाने में डर था। अनलॉक में मौसम की मार है। आर्थिक मदद का अभाव है। बीमारी खत्म होगी तभी सुधार भी दिखेगा। किसान कार्ड देने में बैंक सहायता नहीं कर रही। बैंक कई शर्त थोप देते है। कहते है कि 18 बैंकों से एनओसी लेकर आओ।
उद्योग क्षेत्र लॉक व अनलॉक में रहा ठप
सबसे बुरा हाल कोरोना महामारी में उद्योग क्षेत्र का रहा। लॉकडाउन में तो ठप रहा ही अनलॉक-3 में भी फैक्ट्रर यों में प्रोडक्शन नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि दो राज्यों की नीति। उद्योग क्षेत्र के लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार ने व्यापार करने को तो कहा लेकिन जैसे ही दूसरे राज्य में जाते है क्वारंटीन कर दिया जाता है। दिल्ली के आर्थोकि सहयोग में करीब 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी उद्योग जगत की है। उद्योग से जुड़े बलदेव कुमार गुप्ता का कहना है कि राज्य सरकारों की अलग-अलग कोरोना नीति के कारण प्रोडक्शन नहीं हो रहा। लॉकडाउन-पूरी तरह से ठप रहा। 1 जून से खुला लेकिन अभी भी प्रोडक्शन नहीं हो रहा है। अनलॉक में भी कोई फायदा नहीं। जहां तक उम्मीद की बात है तो पूरा साल ही किसी तरह की उम्मीद नहीं है।