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भू-जल दोहन करने वाले बिल्डर पर एनजीटी ने लगाया 50 लाख का जुर्माना

Sun, 06 Mar 2016 10:12 AM IST
विवेक मिश्रा /अमर उजाला, नई दिल्ली
विवेक मिश्रा /अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 06 Mar 2016 10:12 AM IST
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50 Lakh fine on builder for misusing ground water in noida
NGT

यूपी के गौतमबुद्ध नगर जिले के बिसरख गांव में एक तरफ किसान गिरते भू-जल स्तर और सूखे की मार से परेशान हैं, वहीं बिल्डर्स के जरिये इलाके में अंधाधुंध तरीके से अवैध भू-जल दोहन करने और इलाके में गहरी मिट्टी की खुदाई की जा रही है।

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ऐसी ही एक याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित बिल्डर कंपनी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी का यह फैसला किसान संघर्ष समिति की ओर से दाखिल याचिका पर आया है।
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याची मुकेश कुमार ने दावा किया था कि ग्रेटर नोएडा स्थित कैपिटल एथीना बिल्डर्स बिसरख के प्रोपराइट सिद्धार्थ शर्मा और उनके पार्टनर नवीन राणा ने अवैध तरीके से गांव में 40 फीट गहरी मिट्टी की खुदाई की साथ ही निर्माण के लिए अवैध तरीके से भू-जल का दोहन कर हिंडन नदी को भी प्रदूषित किया है।
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संबंधित मामले पर जुर्माने का यह फैसला जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनाया है। याची का यह भी आरोप था कि संबंधित बिल्डर की वजह से कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

याची ने बेंच से मांग की थी कि वह बिल्डर्स को इन गतिविधियों के लिए रोकें साथ ही प्राधिकरणों को इलाके में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने के लिए निर्देश जारी करें।

निर्माण में 31.45 लाख लीटर पानी की जरूरत 

50 Lakh fine on builder for misusing ground water in noida
Ground Water

वहीं, बिल्डर्स ने सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल को बताया था कि वे बिसरख गांव से नजदीक पश्चिम ग्रेटर नोएडा के सेक्टर एक में 33941.79 वर्ग मीटर क्षेत्र में आवासीय फ्लैट्स का निर्माण कर रहे हैं।

इस निर्माण में उन्हें कुल 31,45,266 लीटर पानी की जरूरत होगी। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित बिल्डर्स पॉल्युटर प्रिंसिपल पे के तहत 50 लाख रुपये का जुर्माना उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को दो महीने के भीतर भरेंगे। यूपीपीसीबी जुर्माने की इस राशि को अलग खाता बनाकर इलाके के पुनरुद्धार में खर्च करेगी।

वहीं, बेंच ने कहा कि यूपी सरकार गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी, यूपीपीसीबी, जल संसाधन विभाग के सदस्य, ग्रेटर नोएडा के वरिष्ठ अधिकारी और केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण के प्रतिनिधि को शामिल करते हुए एक कमेटी बनाए जो कि प्रभावित गांव के लिए पर्यावरण समस्या पर योजना तैयार करे।

तीन महीनों में तैयार करनी होगी गाइडलाइन

50 Lakh fine on builder for misusing ground water in noida
Building Construction

खासतौर से कमेटी गिरते भू-जल स्तर को सुधारने और वाटर रिचार्ज करने के लिए भी योजना बनाए। इस योजना में संबंधित गांव वालों की सिफारिशों को भी शामिल किया जाए। 

इतना ही नहीं ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी संबंधित इलाके में भविष्य में किसी भी निर्माण को अनुमति देने से पहले केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण से भी सहमति ले।

इसके अलावा बिल्डर्स के प्लान पर पर्यावरण को ध्यान रख विस्तृत जांच-परख भी की जाए। इस संबंध में बिल्डर्स के लिए गाइडलाइन भी तैयार होनी चाहिए। यह सभी काम प्राधिकरणों को तीन महीने के भीतर करना होगा।

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