दिल्ली के टॉप 5 प्राईवेट अस्पतालों में चल रहा गंदा खेल!
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सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब रंजित राठौर अस्पताल पहुंच तो उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें बेहतर मेडिकल सुविधा प्राप्त होगी। रंजित ने बस गलती ये कर दी कि वो एक प्राईवेट अस्पताल में अपना इलाज कराने चले गए।
नौ दिन के इलाज के बाद रंजित को 11 लाख रुपये का मेडिकल बिल थमाया गया। दिल्ली के बदरपुर में रहने वाले रंजित ने जब इस बिल को चुकाने में असमर्थता जाहिर की तो उन्हें अस्पताल के ही फ्री-वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
रंजित की परेशानी तब और बढ़ गई जब इस वार्ड में आने के बाद उन्हें पता चला कि यहां तो डॉक्टर बहुत मुश्किल से ही आते हैं और इस वार्ड के मरीजों के बारे में अस्पताल सबसे कम गंभीर है।
ऐसा नहीं है कि ये एक मात्र घटना है बल्कि ऐसी ही कई घटनाओं ने देश की राजधानी में प्राईवेट अस्पतालों में चल रहे ऐसे गोरखधंधे का खुलासा किया है जो किसी को भी चौंका देने के लिए काफी हैं।
कौन से प्राईवेट अस्पताल हैं शक के घेरे में
रंजित का कहना है कि ये प्राईवेट अस्पताल केवल बड़े-बड़े बिल बनाने में रुचि रखते हैं। दिल्ली मेडिकल काउंसिल की शिकायत के बाद दिल्ली मेडिकल काउंसिल पांच प्राईवेट अस्पतालों के कार्यप्रणाली पर निगाह रखे हुए है और उनकी जांच की जा रही है।
इन अस्पतालों की लिस्ट में साकेत और शालीमार बाग में बने मैक्स हॉस्पिटल, फोर्टिस अस्पताल, अपोलो हॉस्पिटल, लेफ्टिनेंट राजन धल अस्पताल, बीएलके हॉस्पिटल सहित सर गंगाराम अस्पताल का नाम भी शामिल है।
रंजित राठौर के मामले में अपोलो अस्पताल की लापरवाही की बात सामने आने पर जब अस्पताल प्रशासन से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अस्पताल की लापरवाही के चलते पिता को खोया
मालूम हो कि इसी साल अपोलो अस्पताल के कुछ कर्मचारी और डॉक्टरों पर किडनी रैकेट चलाने का भी आरोप लग चुका है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉक्टर गिरीश त्यागी बताते हैं कि 2015 में इस तरह की लापरवही की 253 शिकायतें मिली थीं।
अपने पिता का इलाज कराने लेफ्टिनेंट राजन धल अस्पताल गए देवाशीष भट्टाचार्य बताते हैं कि गलत इलाज के कारण उनके पिता की हालत इतनी नाजुक हो गई कि गंभीर हालत में उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा।
देवाशीष बताते हैं कि अगर अस्पताल में उनका सही इलाज किया गया होता तो उनके पिता जिंदा होते। इसके बाद ही देवाशीष ने मेडिकल काउंसिल में जाकर अस्पताल की शिकायत की।
अभी तक नहीं हुई किसी के खिलाफ कार्यवाही
मालूम हो कि शालिमार बाग के फोर्टिस हॉस्पिटल में एक मरीज के पैर का गलत इलाज करने की शिकायत की गई थी जिसके बाद अस्पताल की काफी किरकिरी हुई थी।
शिकायतों की ये लिस्ट काफी लंबी है और चौंकाने वाली बात ये है कि मेडिकल काउंसिल में शिकायत के बाद भी अभी तक इन अस्पतालों के खिलाफ न तो कोई कार्यवाही हुई है और न ही इन अस्पतालों की कार्यप्रणाली में ही कोई सुधार हुआ है।
साभार: dailymail