5 मौके, जब केजरीवाल की 'नीयत' पर उठे सवाल
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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल खुद को हमेशा नीयत का साफ बताते हैं। और उनकी पार्टी नई तरह की राजनीति करने का दावा करती रही है। लेकिन पिछली दिनों हुई कुछ घटनाओं ने अरविंद की नीयत और आप की नई राजनीति दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
आपको खयाल होगा कि अरविंद केजरीवाल ने अपनी पहली पारी में कैसे आम सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था। बाद में उनकी मर्जी के खिलाफ सामान्य सुरक्षा मुहैया कराई गई, तो लगातार उन्हें यह कहते सुना गया कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है। यही नहीं, केजरीवाल ने वीआईपी कल्चर का पुरजोर विरोध किया था।
लेकिन हाल ही में भ्रष्टाचार हेल्पलाइन के उद्घाटन समारोह में आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल समेत अपने नेताओं की सुरक्षा के लिए बाउंसर खड़े किए। आप नेताओं समेत कई वीआईपी लोगों को अलग गेट से प्रवेश की सुविधा दी गई।
आप में आंतरिक लोकतंत्र है?
अरविंद केजरीवाल ने भ्रष्टाचार मिटाने को लेकर अब तक जो बड़े फैसले किए हैं, उनमें सबसे आगे है स्टिंग ऑपरेशन। वह स्टिंग और रिकॉर्डिंग के सच को सामने लाने की बात करते हैं।
लेकिन हालिया आप की नेशनल काउंसिल की मीटिंग में रिकॉर्डिंग तो दूर मोबाइल ले जाने से मना कर दिया गया। वहीं, एक सवाल यह भी उठता है कि लोकपाल मुद्दे पर सरकार छोड़ने वाले केजरीवाल क्या अब भी लोकपाल को लेकर उतने ही गंभीर हैं।
बेहद उहापोह की स्थिति में पार्टी ने इस बार नेशनल काउंसिल की मीटिंग में एडमिरल रामदास को आने से मना कर दिया। फिलहाल पार्टी में कोई लोकपाल नहीं है।
सत्ता के लालची हैं केजरीवाल?
अरविंद केजरीवाल पहली पारी में इस्तीफा देने के बाद लगातार दूसरी पार्टियों पर खरीदफरोख्त का आरोप लगाते रहे। यही नहीं, उन्होंने कई अहम मौकों पर स्टिंग ऑपरेशन के जरिए विरोधियों पर तीखे प्रहार किए।
लेकिन हाल ही में पार्टी के पूर्व विधायक राजेश गर्ग से हूई उनकी बातचीत के एक ऑडियो टेप में वे खुद जोड़तोड़ की बात करते सुनते गए।
उस टेप में अरविंद केजरीवाल और राजेश गर्ग में कांग्रेस विधायकों को तोड़कर सरकार बनाने की चेष्टा रखने की बात सामने आई।
क्या केजरीवाल वालेंटियर की सुनते हैं?
आम आदमी पार्टी आम लोगों की है। पार्टी का हर निर्णय जनता की रायशुमारी के बाद होगा। ये सारे दावे अरविंद केजरीवाल अपनी रैलियों में करते सुने जाते हैं।
लेकिन अब इसी मुद्दे पर घमासान छिड़ा हुआ है। पार्टी दो खेमे में बट चुकी है। योगेंद्र यादव का कहना है कि अरविंद केजरीवाल किसी की नहीं सुनते। वो अपनी पार्टी के साथियों से रायशुमारी नहीं करते तो जनता के साथ क्या करेंगे।
बता दें कि हाल ही में सामने आए एक टेप में वह अपने साथियों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए सुने गए।
बच्चों की झूठी कसम खाते हैं केजरीवाल
अपनी पहली पारी में अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अपने बच्चों की कसम खाकर कहा था कि वह कांग्रेस से समर्थन नहीं लेंगे।
हालांकि तब उन्होंने इसके बचाव में अपना पक्ष रखा था कि सरकार बनाने का फैसला उनका नहीं था। उन्होंने जनता की रायशुमारी के बाद यह निर्णय लिया।
लेकिन 49 दिनों बाद ही उन्होंने नाटकीय अंदाज में इस्तीफा दे दिया और तब जनता से कोई रायशुमारी नहीं की।