महज 31 रुपये में दे दी 450 एकड जमीन, जानिए कैसे?
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डीएनडी बनाने के लिए नोएडा ने यह कीमत चुकाई है। यह सब मनमाने एग्रीमेंट के चलते हुआ। डीएनडी बनाने के लिए 12 नवंबर 1997 को अनुबंध हुआ था। इसका निर्माण करीब 408 करोड़ रुपये की लागत से हुआ।
इसके एवज में डीएनडी बनाने वाली कंपनी को करीब 450 एकड़ जमीन भी 31 साल के लीज पर दी गई थी। इसका रेंट एक रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से तय हुआ। दिल्ली, नोएडा और सिंचाई विभाग से यह जमीन लेकर प्राधिकरण ने डीएनडी को लीज पर दिया है। प्राधिकरण ने डीएनडी को दी गई जमीन की जांच करने के लिए जो समिति गठित की थी, उसी ने यह रिपोर्ट तैयार की है।
समिति ने इस जमीन पर स्टांप छूट की भी जांच की, मगर एग्रीमेंट की शर्तों के आधार पर इसमें कोई कमी नहीं मिली है। समिति के एक सदस्य ने बताया कि एग्रीमेंट में 100 रुपये का स्टांप पेपर पहले से ही लगा रखा है, जबकि 31 रुपये का लीज रेंट हो रहा है।
डीएडी पर नहीं बन रहा स्टांप कमी का मामला
इसलिए फिलहाल स्टांप कमी का मामला नहीं बन रहा है। समिति के सदस्यों का यह भी कहना है कि अगर इस जमीन की कोई कीमत तय की गई होती तो स्टांप की कमी की बात हो सकती थी। दूसरे, अगर स्टांप कमी होती भी तो अब जांच करने का कोई फायदा नहीं मिलता।
जमीन 18 साल पहले दी गई थी और स्टांप कमी की जांच करने और मुकदमा दर्ज करने का अधिकार आठ वर्ष तक ही है। इससे ज्यादा वक्त गुजर जाने पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। ऐसा एक्ट में भी प्रावधान है।
इसलिए फिलहाल डीएडी पर स्टांप कमी का कोई मामला नहीं बन रहा है। बता दें कि तमाम संस्थाओं के दबाव के बाद प्राधिकरण ने विगत माह एक कमेटी गठित की थी, जो डीएनडी बनाने के लिए हुए एग्रीमेंट की जांच कर रही है।
इसमें नोएडा प्राधिकरण और रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी शामिल हैं। संस्थाएं जमीन के साथ ही गलत तरीके से स्टांप छूट देकर घपला करने का आरोप लगा रही थीं।
31 साल के लीज पर दी गई थी
ये थी अनुबंध में शर्त- अनुबंध में यह शर्त रख दी गई कि लागत और खर्च निकालने के साथ ही डीएनडी को हर साल 20 फीसदी का मुनाफा भी होगा। अगर मुनाफा न हुआ तो घाटे की यह धनराशि भी मूल रकम में जुड़ जाएगी और फिर अगले साल कुल कीमत का 20 फीसदी मुनाफा होना जरूरी है।
अगर घाटा हुआ तो इसकी भरपाई नोएडा प्राधिकरण करेगा। इसी का नतीजा है कि प्राधिकरण पर 2012 में ही 2334 करोड़ का कर्ज लद चुका है, जो 2031 में बढ़कर 53352 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
डीएनडी पर एक नजर- प्राधिकरण ने 1997 में नोएडा और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी के लिए टोल बनाने का निर्णय लिया। 12 नवंबर 1997 को नोएडा प्राधिकरण और नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड के बीच अनुबंध हुआ। 7 फरवरी 2001 में यह बनकर चालू हुआ। आठ लेन के इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 9.2 किलोमीटर है।
इसे बनाने में कुल 408 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसे कंपनी ने खुद वहन किया। इसकी भरपाई के लिए प्राधिकरण ने डीएनडी पर टोल टैक्स वसूलने का अधिकार 31 साल के लिए कंपनी को दे दिया।