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45 खिलाड़ी, जिनके पास नहीं हैं संसाधन, लेकिन हौसला बुलंद 

Wed, 01 Jun 2016 01:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 01 Jun 2016 01:17 AM IST
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45 players who dont have facilities but performing

किसी भी खेल में चैंपियन बनने की राह आसान नहीं होती, लेकिन इस राह को लगन और मेहनत से पाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही प्रयास कर रहे हैं ऊंचागांव के तीरंदाजी सेंटर में अभ्यास कर रहे 45 खिलाड़ी, इनके पास न तो संसाधन है और न ही बेहतर उपकरण, लेकिन लगन ओर मेहनत में किसी से कम नहीं है।

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यहां प्रशिक्षण लेने वाली किसी बेटी के पिता राजमिस्त्री है तो किसी के पिता खेतीबाड़ी, पुताई, सिलाई करके अपने बच्चों को पाल रहे हैं। कोच दीपक अहलावत व धीरज तीन साल से चैंपियन तैयार करने में जुटे है, इनमें करीब 20 खिलाड़ी नेशनल स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराह चुके है। पेश है पूजा शर्मा की रिपोर्ट
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किसी के पास बांस का, तो किसी के पास पुराना धनुष, लक्ष्य एक  
बल्लभगढ़ से करीब दो किलोमीटर दूर एक सरकारी स्कूल, जहां सुबह और शाम छह से 20 साल तक के गरीब परिवार के बच्चे निशुल्क तीरंदाजी का अभ्यास करते है। किसी के पास बांस का धनुष है तो किसी के पास इससे भी पुराना धनुष। लेकिन सबका लक्ष्य एक ही है कि किस तरह निशाना ठीक लगे और नेशनल स्तर पर अधिक से अधिक गोल्ड जीत हरियाणा का नाम रोशन कर सके। यहां आसपास के 24 गांव से खिलाड़ी अभ्यास के लिए आते है। इनमें प्रवीन शर्मा, विकास डागर, धमेंद्र और कर्मवीर नेशनल स्तर पर मेडलन जीत चुके है। 
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खुद को चैंपियन बनने का जुनून 
तीरंदाजी के इस सेंटर में सभी बच्चें लगन के साथ अभ्यास करते हैं, अधिकांश ऐसे घरों से है, जहां मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पाता है, कुछ ऐसे भी बच्चें की जो अपने पिता की खेतीबाड़ी में मदद करते हैं, लेकिन अपना अभ्यास करना नहीं भूलते।

चार साल से चल रहा है सेंटर
कोच दीपक अहलावत ने बताया कि चार साल पहले चार से पांच गरीब बच्चों से इस सेंटर की शुरूआत की गई थी। इसके बाद गांव-गांव जाकर लोगों को तीरंदाजी खेल व उसके महत्व को बताया गया। लोगों का रूझान बढ़ा और वे सेंटर पर अपने बच्चें को भेजने लगे। दीपक ने बताया कि इस सेंटर से अबतक 70 बच्चे प्रशिक्षण ले सके हैं, इनमें से दो बच्चों को सरकारी नौकरी भी मिली है।

बेलदांर की बेटी बना रही तकदीर 
दस साल की भावना एक खिलाड़ी है, पिता राकेश बेलदार है। भावना तीरंदाजी में अपनी तकदीर बनाने में जुटी हुई है। जिलास्तरीय तीरंदाजी में स्वर्ण जीत चुकी है, वहीं इसका सपना है कि नेशनल स्तर पर गोल्ड जीतकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को ठीक करे। सरकारी स्कूल ऊंचा गांव की छात्रा है।

राजमिस्त्री का बेटा बना है चैंपियन
14 वर्षीय सूरज राजमिस्त्री के बेटे है। तीरंदाजी में ऊंचाईयों को छू रहे है। यह सीबीएसई स्कूल नेशनल व स्टेट तीरंदाजी में रजतच पदक हासिल कर चुके है। इनका सपना देश-विदेश में अपना नाम रोशन करना है। बड़े होकर इसी सेंटर पर यह भी बतौर तीरंदाज कोच गरीबों को प्रशिक्षण देना चाहेंगे।


नेशनल की तैयारी में चपरासी का बेटा 
12 वर्षीय चपरासी का बेटा सन्नी नेशनल की तैयारी में जुटा हुआ है। इनकी माता विद्या सागर स्कूल में चपरासी है। स्कूल की ओर से सन्नी को निशुल्क शिक्षा दी जा रही है। यह राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके है। पिछले तीन साल से खुद की पहचान बनाने में जुटे हुए है।

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