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41 साल पुराना सिविल अस्पताल अब होने लगा है जर्जर
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Tue, 12 Apr 2016 09:23 AM IST
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सिविल अस्पताल में आईसीयू की छत गिरी
- फोटो : अमर उजाला
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गुड़गांव में सिविल लाइन स्थित सिविल अस्पताल की सेहत खराब है। 40 साल पुराने अस्पताल की इमारत अब जर्जर हो गई है। पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा अस्पताल की गायनी वार्ड को कंडम घोषित कर दिया गया है। जबकि अस्पताल को भी असुरक्षित बताया गया है।
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अब अस्पताल के गायनी वार्ड में जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। बता दें कि पिछले साल अस्पताल के दौरे पर आए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी अस्पताल की दशा पर चिंता जाहिर की थी। बीते डेढ़ साल में पांच बार अस्पताल की अलग-अलग जगहों से भारी प्लास्टर गिर चुका है।
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भूकंप के लिहाज से संवेदनशील गुड़गांव में सामान्य अस्पताल की जर्जर हालत हादसे को दावत दे रही है। 200 बेड के सिविल अस्पताल में ओपीडी, इमरजेंसी और अन्य वार्डों में करीब 3000 मरीज आते हैं।
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1975 में शुरू हुए अस्पताल की नींव वक्त के साथ जर्जर हो रही है। जर्जर हो चुका यह अस्पताल जिले की 18 लाख आबादी को सेहतमंद रखने का जिम्मा ढो रहा है। इससे यहां आने वाले मरीजों में हर वक्त असुरक्षा की भावना रहती है, वहीं इलाज और दवाओं के लिए भी उन्हें धक्के खाने पड़ते हैं। मौजूदा समय में अस्पताल में जगह-जगह से सीलिंग और प्लास्टर झड़ रहे हैं। बिल्डिंग के लिंटर और दीवारों में दरार आ चुकी है।
वहीं, सिविल सर्जन कार्यालय, जिला खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग के बिल्डिंग की उम्र 50 साल से अधिक है। सिविल सर्जन कार्यालय को तोड़कर दोबारा बिल्डिंग बनाने की योजना करीब दो साल पहले तैयार की गई, लेकिन वो आज तक सिरे नहीं चढ़ी। त्वचा रोग विभाग के ओपीडी के सामने हर बरसात में पानी टपकता है।
14 करोड़ से हुआ जीर्णोद्धार बेकार
इस सिविल अस्पताल की बूढ़ी इमारत पर 2009 में करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से जिप्सम बोर्ड की छत, टाइल्स, पलास्तर व रंग-रोगन की लीपापोती तो कर दी गई, लेकिन बिल्डिंग की मजबूती पर काम नहीं हो पाया। रंगरोगन से इसकी बाहरी सेहत तो ठीक-ठाक दिख रही है, लेकिन अंदर से इसकी बिल्डिंग की हालत बहुत ही नाजुक है। अब तो कैंसर वार्ड के बाहर खड़ी लेंटर भी गिरने लगी है। अस्पताल के पहली मंजिल में बाहर से देखने पर दरार साफ झलकती है। ग्राउंड फ्लोर के छत की सिलिंग जगह से जर्जर हो चुकी है।
विकल्प नहीं बन सका सेक्टर-10 का अस्पताल
सिविल लाइन स्थित सामान्य अस्पताल का विकल्प के तौर पर सेक्टर-10 स्थित सामान्य अस्पताल-2 का निर्माण किया गया था। मगर, अस्पताल आज तक विकल्प नहीं बन सका। 43 पदों के बदले केवल 17 डॉक्टर है। इमरजेंसी जैसी सुविधाएं भी यहां नहीं हैं। हाल ही में ऑपरेशन थियेटर शुरू किया गया था, जिसके बाद प्रसूति की सुविधा शुरू की गई। सिविल लाइन अस्पताल से अब गायनी वार्ड और नीकू को सेक्टर-10 के अस्पताल में शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है।
पूरे अस्पताल की सिविल ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। पूरे अस्पताल को सिविल इंजीनियर के एक्सपर्ट को दिखाकर इसे दुरुस्त कराने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। जीर्णोद्धार के लिए विभाग के आला अधिकारियों से बातचीत कर इस पर फैसला लिया जाएगा।- डॉ. रमेश धनखड़, सिविल सर्जन