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धरती के भगवान: 16 घंटे चली किर्गीस्तानी बच्ची की सर्जरी, 3डी प्रिंटिंग तकनीक से 130 से 30 डिग्री हुआ कूबड़

Thu, 21 Jul 2022 12:18 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 21 Jul 2022 12:18 AM IST
सार

आकाश अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, हर बीतते दिन के साथ लड़की की हालत खराब होती जा रही थी। ज्यादा दर्द होने से वह चल भी नहीं पा रही थी। इससे उसका शरीर एक तरफ झुकता जा रहा था। अस्पताल पहुंचने पर दो चरणों में 16 घंटे की स्पाइन सर्जरी की गई।

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3D printing technology used in surgery for 12-year-old girl from Kyrgyzstan
पीड़ित बच्ची और डॉक्टर - फोटो : amar ujala

विस्तार

किर्गिस्तान की 12 वर्षीय बच्ची की दिल्ली में दुलर्भ सर्जरी हुई है। इलाज के लिए 3-डी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। पीड़िता प्रोग्रेसिव स्कोलियोसिस डोर्सोलुंबर से पीड़ित थी। इससे उसकी रीढ़ काफी ज्यादा झुक गयी थी। वहीं, पेल्विक ओब्लिकनेस से भी पीड़ित होने से उसका एक कूल्हा दूसरे से बड़ा था। सर्जरी से 130 डिग्री तक झुके कूबड़ को 30 डिग्री कम कर दिया गया है। 

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आकाश अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, हर बीतते दिन के साथ लड़की की हालत खराब होती जा रही थी। ज्यादा दर्द होने से वह चल भी नहीं पा रही थी। इससे उसका शरीर एक तरफ झुकता जा रहा था। अस्पताल पहुंचने पर दो चरणों में 16 घंटे की स्पाइन सर्जरी की गई। 16 घंटे तक चली सर्जरी के पहले चरण में नरम ऊतकों को हटाया गया और कोरोनल प्लेन में एलाइनमेंट को सही करते हुए रीढ़ के लचीलेपन को बढ़ाने के लिए कई हड्डियों कम किया गया। वहीं, 10 घंटे की दूसरी सर्जरी में 3डी-प्रिंटेड जिग्स की मदद से कई टाइटेनियम स्क्रू का इस्तेमाल किया गया। 
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डॉ. नागेश चंद्रा ने 3डी प्रिंटिंग के बारे में बताया कि रीढ़ की गंभीर बीमारी और स्क्रू डालने में होने वाली कठिनाई के कारण 3डी प्रिंटिंग सर्जरी सुरक्षित तरीके से की जा सकती है। हड्डी का आकार मापकर सर्जिकल प्लानिंग में 3डी प्रिंटिंग से स्क्रू लगाया जाता है। हर चरण में 3डी प्रिंटिंग से स्क्रू के आकार, लंबाई और दिशा की योजना बनाने में मदद मिलती है। सर्जरी के बाद कूबड़ को लगभग 70 से  80 फीसदी ठीक कर दिया जाता है। इस मामले में अब पीड़िता की रीढ़ की हड्डी का टेढ़ापन घटकर महज 30 डिग्री रह गया है।

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