{"_id":"6aa2c8201739718e100ac8d5","slug":"30-of-lives-are-lost-during-the-golden-hour-with-external-bleeding-the-leading-cause-of-death-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-154341-2026-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस: गोल्डन आवर में जाती हैं 30 प्रतिशत जानें, बाहरी रक्तस्राव मृत्यु की सबसे बड़ी वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस: गोल्डन आवर में जाती हैं 30 प्रतिशत जानें, बाहरी रक्तस्राव मृत्यु की सबसे बड़ी वजह
विज्ञापन
नोट: इस खबर को डीटीसी लाइव के साथ लें
विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस:
सिमरन
नई दिल्ली। सड़क पर हादसा होते ही भीड़ जुट जाती है, फोन निकलते हैं और एंबुलेंस का इंतजार शुरू हो जाता है। लेकिन घायल के लिए असली जंग उसी पल शुरू हो चुकी होती है। अस्पताल पहुंचने से पहले का शुरुआती समय, जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है, गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए बेहद अहम होता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,617 लोगों की मौत हुई। इनमें 649 पैदल यात्री थे। हादसे के बाद एंबुलेंस पहुंचने तक घायल को सही प्राथमिक उपचार न मिल पाना कई मौतों की बड़ी वजह बन जाता है।
एम्स ट्रॉमा सेंटर में ट्रॉमा सर्जरी और क्रिटिकल केयर के प्रोफेसर डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में दुर्घटना के करीब 50 प्रतिशत मरीजों की मौत मौके पर ही हो जाती है। वहीं, 30 प्रतिशत मरीजों की मौत गोल्डन आवर यानी अस्पताल पहुंचने तक के अंतराल में या एक से दो घंटे के भीतर हो जाती है। बाकी 20 प्रतिशत मरीजों की मौत छह से सात दिन के भीतर अस्पताल में होती है। डॉक्टरों का कहना है कि गोल्डन आवर के दौरान सही प्राथमिक उपचार मिलने से कई जानें बचाई जा सकती हैं।
एम्स ने मुफ्त में दी प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग
डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मौतें बाहरी रक्तस्राव (एक्सटरनल ब्लीडिंग) के कारण होती हैं। तेज रक्तस्राव को समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो घायल की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए आम लोगों, ड्राइवरों और राहगीरों में प्राथमिक उपचार को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है। सही प्रशिक्षण मिलने पर वे एंबुलेंस आने तक घायल की मदद कर सकते हैं।
विज्ञापन
एम्स ने इसी दिशा में कमर्शियल ड्राइवरों को प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दी है। इसमें सीपीआर, रक्तस्राव रोकने और घायल को सुरक्षित तरीके से ले जाने की जानकारी दी गई। इसके अलावा आम लोगों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और वाहन चालकों को भी मुफ्त प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया है।
विज्ञापन
विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस:
सिमरन
नई दिल्ली। सड़क पर हादसा होते ही भीड़ जुट जाती है, फोन निकलते हैं और एंबुलेंस का इंतजार शुरू हो जाता है। लेकिन घायल के लिए असली जंग उसी पल शुरू हो चुकी होती है। अस्पताल पहुंचने से पहले का शुरुआती समय, जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है, गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए बेहद अहम होता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,617 लोगों की मौत हुई। इनमें 649 पैदल यात्री थे। हादसे के बाद एंबुलेंस पहुंचने तक घायल को सही प्राथमिक उपचार न मिल पाना कई मौतों की बड़ी वजह बन जाता है।
एम्स ट्रॉमा सेंटर में ट्रॉमा सर्जरी और क्रिटिकल केयर के प्रोफेसर डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में दुर्घटना के करीब 50 प्रतिशत मरीजों की मौत मौके पर ही हो जाती है। वहीं, 30 प्रतिशत मरीजों की मौत गोल्डन आवर यानी अस्पताल पहुंचने तक के अंतराल में या एक से दो घंटे के भीतर हो जाती है। बाकी 20 प्रतिशत मरीजों की मौत छह से सात दिन के भीतर अस्पताल में होती है। डॉक्टरों का कहना है कि गोल्डन आवर के दौरान सही प्राथमिक उपचार मिलने से कई जानें बचाई जा सकती हैं।
विज्ञापन
एम्स ने मुफ्त में दी प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग
डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर मौतें बाहरी रक्तस्राव (एक्सटरनल ब्लीडिंग) के कारण होती हैं। तेज रक्तस्राव को समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो घायल की हालत तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए आम लोगों, ड्राइवरों और राहगीरों में प्राथमिक उपचार को लेकर जागरूकता बेहद जरूरी है। सही प्रशिक्षण मिलने पर वे एंबुलेंस आने तक घायल की मदद कर सकते हैं।
विज्ञापन
एम्स ने इसी दिशा में कमर्शियल ड्राइवरों को प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दी है। इसमें सीपीआर, रक्तस्राव रोकने और घायल को सुरक्षित तरीके से ले जाने की जानकारी दी गई। इसके अलावा आम लोगों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और वाहन चालकों को भी मुफ्त प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया है।