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30 फीसदी फ्लैट्स को खरीदारों का इंतजार
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sat, 23 Aug 2014 03:39 PM IST
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बीते डेढ़ साल से मंदी की मार से परेशान शहर का रीयल एस्टेट सेक्टर अब तक इससे नहीं उबर पाया है। हालात यह हैं कि शहर में बने करीब 200 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में से 80 से अधिक में करीब 30 से 40 फीसदी फ्लैट्स खाली पड़े हैं।
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निवेश के लिहाज से प्रॉपर्टी खरीदने वालों और नए प्रोजेक्ट बना रहे बिल्डरों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। हवाहवाई विकास की बुनियाद पर टिका शहर का रीयल एस्टेट सेक्टर मंदी से निकल ही नहीं पा रहा है।
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हवाहवाई दावों, इंफ्रास्ट्रक्टर और कीमतों ने बिगाड़ा खेल- दिल्ली के नजदीक गाजियाबाद रिहाईश का बेहतर विकल्प बना। बीते एक दशक में शहर में इंदिरापुरम, कौशांबी, वैशाली, वसुंधरा, साहिबाबाद आदि क्षेत्रों में जबर्दस्त प्रापर्टी की जबर्दस्त डिमांड रही।
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इसी डिमांड को बिल्डरों ने मेट्रो, हाईस्पीड, मोनो रेल, एक्सप्रेस-वे, फ्लाईओवर, दिल्ली की तर्ज पर सुविधाओं आदि के हवाहवाई दावों से और उछाला। घर-जमीन की कीमतें आसमान छूने लगीं। लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर शहर नोएडा-दिल्ली से काफी पीछे रह गया।
अब फ्लैट्स की कीमतें तो आसमान छू रहीं हैं, लेकिन सुविधाएं नदारत हैं। ऐसे में गाजियाबाद में 70-80 लाख के फ्लैट की तुलना में लोग नोएडा-दिल्ली में 10-20 लाख और देकर प्रापर्टी खरीदना बेहतर मान रहे हैं।
सर्किल रेट से महंगे हुए फ्लैट-अगस्त में लागू हुए सर्किल रेट से कई क्षेत्रों में 30 से 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। सर्किल रेट में बढ़ोतरी से जहां अधिक स्टांप शुल्क चुकाना पड़ रहा है, वहीं बिल्डरों के लिए नक्शा पास कराने, कंपाउंडिंग फीस के रूप में अधिक धनराशि देनी पड़ रही है।
इसका सीधा असर फ्लैट्स की कीमत पर पड़ रहा है। ऊंची कीमतों और इंफ्रास्ट्रक्टर के अभाव ने शहर के कई हाउसिंग प्रोजेक्ट में खरीदारों का टोटा ला दिया है।
जीडीए तक की स्कीमों मंें डिफाल्टर है। क्रासिंग्स रिपब्लिक सीओओ अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि टाउनशिप विकास के दौर में है। करीब 30 फीसदी फ्लैट में आक्युपेंसी नहीं है, लेकिन इसके कई कारण है।
मार्केट में स्लोडाउन है। सर्किल में इजाफे ने सेक्टर की परेशानी बढ़ा दी है। टाउनशिप में 9 मीटर, 18 मीटर चौड़ी रोड न होने के बावजूद मुताबिक नए सर्किल रेट लगा दिए गए।
कहां कितने फ्लैट्स बने (अनुमानित)
एनएच-58 के आसपास 10-12 हजार
एनएच-24 के आसपास 5-7 हजार
वैशाली, इंदिरापुरम 15-20 हजार
साहिबाबाद 5-10 हजार
वसुंधरा 2 से 3 हजार
अन्य जगह 10-15 हजार
यहां खाली पड़े फ्लैट्स (अनुमानित)
एनएच-58 के आसपास 5 से 6 हजार
एनएच-24 के आसपास 2 से 3 हजार
वैशाली, इंदिरापुरम 4 से 5 हजार
साहिबाबाद 2 से 3 हजार
वसुंधरा 800 से 1 हजार
अन्य जगह 5 से 7 हजार