कन्हैया का भाषण 30 लाख लोगों ने किया शेयर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेएनयू कैंपस में कन्हैया द्वारा दिए गए भाषण को करीब तीस लाख लोगों ने शेयर किया है। कन्हैया ने जिस तल्खी व जुमलों के साथ केंद्र सरकार को घेरते हुए आरएसएस पर हमला किया, उसे नेताओं ने ही नहीं, यूजर्स ने भी पसंद किया है। पिछले डेढ़ दिन से कन्हैया फेसबुक के टॉप ट्रेंड में हैं।
जबकि कन्हैया से जुड़ी जानकारियां जानने के लिए करीब दस लाख लोगों ने गूगल सर्च ईंजन पर सर्च किया है। खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर यूजर्स कन्हैया की तुलना अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे-ग्वेरा से कर रहे हैं। लाल दुर्ग में जेल के अनुभव और भूखमरी, कट्टरता, जातिवाद, शोषण, भ्रष्टाचार से आजादी की सोच पर दिए गए भाषण सोशल मीडिया के टॉप ट्रेंड में है।
फेसबुक पर यूजर्स बेशक वामपंथी विचारधारा के पक्षधर न हों, लेकिन कन्हैया ने जिन मुद्दों के साथ नब्ज टटोली है, उसे यूजर्स का साथ मिल रहा है।
कन्हैया की मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे-ग्वेरा से तुलना
अभिषेक लिखते हैं कि कन्हैया ने आम लोगों की बात की, हालांकि सरकार या व्यक्ति विशेष पर सीधा आरोप गलत है। यह हर सत्ताधारी सरकार करती है। इसलिए विरोध में सभी पार्टियों को निशाना बनाना चाहिए। सिर्फ आरएसएस या बीजेपी नहीं। कांग्रेस के कार्यकाल में भी ऐसा हुआ था।
सोशल मीडिया पर अर्जेंटीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे -ग्वेरा से कन्हैया की तुलना की जा रही है। यूजर्स लिखते हैं कि दोनों ही बुंलद आवाज में क्रांति के पक्षधर हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कन्हैया और चे-ग्वेरा के फोटो आमने-सामने कर दिए हैं।
वहीं, फेसबुक और टिवटर पर बुद्धिजीवी कन्हैया में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष चंद्रशेखर की छवि देख रहे हैं, जोकि कन्हैया की तरह आम आदमी की बात करते थे, उनके संघर्षों की लड़ाई लड़ते थे। यूजर्स का कहना है कि यदि चंद्रशेखर होते तो वे कन्हैया केे मामले में उसी बुलंद आवाज से हल्ला बोलते।