'अंकल 10 महीनों से इस कमरे में बंद हूं, मुझे मेरी मां के पास ले चलो'
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अंकल मुझे मेरी मां के पास ले चलो, पुलिस टीम को देखकर एक 11 वर्षीय बच्चा रोते हुए उनसे लिपट गया और बोलने लगा कि मैं 10 महीनों से यहां इस कमरे में बंद हूं, सारा दिन चूड़ियां बनाता रहता हूं।
मुझे मेरी मां के पास जाना है। यह नजारा उत्तर-पूर्वी जिले में चूड़ी फैक्ट्री का था, जब बचपन बचाओ आंदोलन संस्था की सूचना पर एसडीएम सीलमपुर के सहयोग से दिल्ली पुलिस नाबालिग बच्चों को छुड़वाने के लिए छापा मारने पहुंची।
संस्था के अध्यक्ष आरएस चौरसिया के मुताबिक, उत्तर पूर्वी जिला के गौतम नगर, उस्मान नगर में बृहस्पतिवार देर शाम छापा मारकर 22 बच्चों को छुड़वाया गया।
एक हफ्ते काम के मिलते 20 रुपये
छापे के दौरान देखा कि उक्त बच्चा छोटे से कमरे में काम कर रहा था। जहां गैस वेल्डिंग मशीन, केमिकल कलर और चूड़ियों को शेप देने वाली लोहे की राड रखी हुई थीं।
इस दौरान एक अन्य बच्चे ने बताया कि दिनरात काम करने के बाद भी उसे हफ्ते में 20 रुपये मिलते थे, जिन्हें वो घर भेजने के लिए इकट्ठा कर रहा है। बच्चों को छुड़वाकर मुक्ति आश्रम भेज दिया गया है। इनमें से अधिकतर बच्चे बिहार के रहने वाले हैं।