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दिल्ली सरकार के 21 आप विधायकों की सदस्यता जाना तय

Wed, 15 Jun 2016 09:44 AM IST
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 15 Jun 2016 09:44 AM IST
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21 MLAs of Delhi aam admi party
- फोटो : जी पाॅल

दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त 21 संसदीय सचिवों को कानूनी मान्यता प्रदान करने संबंधी बिल राष्ट्रपति ने भले ही वापस भेज दिया हो, लेकिन इन विधायकों की सदस्यता निरस्त की जाएगी या नहीं इस मुद्दे पर गेंद अभी चुनाव आयोग के पाले में है। कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो संसदीय सचिव बनाए गए 21 विधायकों की सदस्यता जाना तय है, लेकिन अंतिम निर्णय आयोग की राय से ही होगा।

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प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का मानना है कि राष्ट्रपति की ओर से 21 संसदीय सचिवों को कानूनी मान्यता प्रदान करने के संबंध में दिल्ली सरकार के बिल को खारिज या वापस करने की स्थिति में उक्त सभी विधायक अयोग्य हो गए हैं। यह जरूरी है कि इस मामले में चुनाव आयोग की राय ली जाए।
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दिल्ली सरकार राष्ट्रपति के पास बिल को लेकर पुनर्विचार के लिए नहीं कह सकती। कश्यप का मानना है कि बिल पास कर सरकार ने मान लिया कि संसदीय सचिव का पद प्रोफिट का पद है और जब बिल पास किया गया उससे पहले से विधायक इस पद पर थे। ऐसे में यदि बिल पास भी हो जाता तो उन पर लागू नहीं होना था यानी कानून बनने से पहले वे पद पर थे।
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कश्यप का मानना है कि सरकार को इस पद पर नियुक्ति से पहले कानून बनाना चाहिए और फिर किसी को नियुक्त करना चाहिए। इसके लिए पूरी प्रक्रिया का पालन करना था। अब विधायकों को अयोग्य ठहराने के बाद छह माह में उपचुनाव जरूरी है। इस मामले को लेकर सरकार अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।

लेकिन संविधान के तहत न किए गए कार्य पर राहत मिलने की उम्मीद कम ही है। अदालत यह देखेगी कि संविधान का अनुपालन हुआ है या नहीं। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एमएल लाहोटी का भी मानना है कि राष्ट्रपति द्वारा बिल वापस करने पर संसदीय सचिव बनाए गए विधायक अयोग्य ठहराए गए हैं।


सरकार भविष्य के लिए फिर से बिल ला सकती है, अब तो यह पद प्रोफिट का ही माना जाएगा। पिछली डेट से बिल पास नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के पास भी याचिका विचाराधीन है। राष्ट्रपति के निर्णय के बाद गेंद आयोग के पाले में आ गई है। अब यदि आयोग ने इन विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया तो फिर उपचुनाव तय है।

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