फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   18 Tihar inmates sent to Haridwar, the initiative was to give new life

तिहाड़ के 18 कैदियों को भेजा हरिद्वार, नई जिंदगी देने की हुई पहल  

Wed, 05 Oct 2016 10:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 05 Oct 2016 10:33 AM IST
विज्ञापन
18 Tihar inmates sent to Haridwar, the initiative was to give new life
तिहाड़ जेल

तिहाड़ जेल में गंभीर अपराधों में वर्षों से सजा काट रहे कैदियों को नई जिंदगी देने की पहल हुई है। तिहाड़ प्रशासन ने इन कैदियों के लिए रूपांतरण यात्रा की शुरुआत की है। 

विज्ञापन


इसके तहत 18 कैदियों को फरलो (थोड़े दिन की छुट्टी) पर दो सप्ताह के लिए हरिद्वार के पंचवटी योगाश्रम ले जाया गया, जहां योग के साथ इन्हें खुलेपन से जीने का मौका मिला। देश में पहली बार तिहाड़ जेल ने ऐसी पहल की है।
विज्ञापन

  
जेल महानिदेशक सुधीर यादव ने बताया कि तीन साल तक जेल में रहने के दौरान अच्छा बर्ताव करने वाले कैदियों को फरलो दी जाती है। जेल में बंद ऐसे कई कैदी हैं, जो 10 से लेकर 18 साल की सजा काट चुके हैं लेकिन उन्होंने कभी फरलो के लिए आवेदन नहीं किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह पाया गया कि ऐसे कैदी समाज के मुख्य धारा से अलग-थलग पड़ गए हैं। जेल में भी उनसे मिलने के लिए कोई नहीं आता है। सजा पूरी होने के बाद समाज के प्रति इनकी प्रतिक्रिया क्या होगी। लिहाजा, इन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के लिए फरलो पर पंचवटी आश्रम भेजा गया। 

कैदियों में बढ़ी जीने की ललक

18 Tihar inmates sent to Haridwar, the initiative was to give new life
tihar - फोटो : फाइल फोटो

मुंडन बाद हुआ यज्ञोपवीत संस्कार
जेल महानिदेशक ने बताया कि ऐसे 18 कैदियों की सूची तैयार की गई। इन्हें स्वामी आशुतोष की देखरेख में 21 सितंबर को हरिद्वार भेजा गया।  जहां इनका मुंडन व यज्ञोपवीत संस्कार किया गया।

इन्हें योग के विभिन्न आसन भी करवाए गए। स्वामी आशुतोष के मुताबिक, पहले चार दिन तक कैदी असहज दिखे लेकिन उसके बाद उनमें एक नया उमंग देखा गया। 

बढ़ी जीने की ललक
कैदी संतराम ने बताया कि वह पिछले 11 साल से सजा काट रहे हैं। परिवार वाले मिलने नहीं आते और न ही उनका बाहर जाने का दिल करता है। इस रूपांतरण यात्रा ने उनके भीतर नई जिंदगी का उत्साह पैदा किया है।

कैदी अशोक ने बताया कि उनके पिता बुजुर्ग हैं। वह जेल में मिलने नहीं आ पाते हैं। कभी-कभी लगता था कि यह जिंदगी बेकार हो गई है। इस यात्रा से जीवन को अध्यात्म की ओर ले जाने की प्रेरणा मिली है। 

कई कैदियों ने बताया कि जेल में आने के बाद धीरे-धीरे परिवार वालों ने मुंह मोड़ लिया। ऐसी स्थिति में वह जीवन से निराश हो गए थे। लेकिन अब वह अपने साथ-साथ अन्य लोगों के जीवन में भी उत्साह भरने की कोशिश करेंगे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed