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खुलासा: नशे में झूम रहे राजधानी के 16 फीसदी लोग, बन रहे हैं मनोरोगी

Thu, 01 Oct 2020 10:37 AM IST
प्राची प्रियम अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 01 Oct 2020 10:37 AM IST
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16 percent of Youths and people in Delhi are addicted to drugs or alcohol causes mental illness
प्रतीकात्मक तस्वीर

नशे की समस्या एक विकराल रूप लेती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के 29 फीसदी लोग नशे की गिरफ्त में हैं। शराब व अन्य नशा करने वालों के मामले में दिल्ली देश में 11वें स्थान पर है। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां नशे की लत के कारण लोगों ने कई गंभीर घटनाओं को अंजाम दिया है। 

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डॉक्टरों का कहना है कि अन्य मनोरोगों की तरह यह भी एक बीमारी है। समय पर लक्षणों की पहचान होने से इसका इलाज आसानी से संभव है। दिल्ली के सबसे बड़े मनोरोग अस्पताल मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर ओमप्रकाश बताते हैं कि हर प्रकार के नशे की लत से ग्रसित होना एक मनोरोग है। बीमारियों की तरह यह भी एक रोग है। 
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इसके भी कई प्रकार के लक्षण होते हैं, जिनसे पता चल जाता है कि व्यक्ति की यह लत उसे रोगी बना चुकी है। कोई भी व्यक्ति नशा समूह के दबाव या स्वयं की उत्सुकतावश शुरू करता है, लेकिन यही दबाव या उत्सुकता नशे की लत की ओर धकेल देती है। 
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समय के साथ नशे की शारीरिक एवं मानसिक निर्भरता बढ़ती जाती है। जब कोई भी नशीला पदार्थ शरीर में जाता है तो इसके परिणाम स्वरूप कई बदलाव होते हैं। इससे व्यक्ति को अलग अनुभूति होती है। ऐसा करते-करते वह शारीरिक व मानसिक रूप से नशे का आदी होता चला जाता है।  

एक समय ऐसा जाता है कि व्यक्ति नशे पर पूरी तरह से आश्रित हो जाता है और वह उसके बिना नहीं रह सकता। इस स्थिति में उसको मानसिक समस्याएं होने लगती हैं और कई बार यह समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है। 

उन्होंने बताया कि नशे के कारण होने वाली बीमारी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानसिक समस्याओं के अंतर्गत शामिल किया है। इस प्रकार के रोगियों के लिए अस्पताल के अंदर पुनर्वास केंद्र बनाया गया है, जहां उनका इलाज किया जाता है।

ऐसे होता है इलाज
डॉक्टर के मुताबिक, विभिन्न प्रकार की दवाइयों से व्यक्ति के अंदर नशे की लत को खत्म किया जाता है। साथ ही विभिन्न मनोवैज्ञानिक विधियों से उसकी नशे के प्रति मानसिक निर्भरता को दूर किया जाता है। रोगी को भविष्य में नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाता है। रोगी ही नहीं उसके परिवारवालों व आसपास के समाज को भी जागरूक किया जाता है।

नशे की लत वाले व्यक्ति के मानसिक रोगी बनने पर दिखाई देते हैं यह लक्षण-

- शारीरिक या मनोवैज्ञानिक नुकसान हो जाने के बाद भी इस तरह के नशे को करते रहना।
- नशीले पदार्थों को खरीदने के लिए चोरी जैसे काम भी करना।
- नशे में होने के बावजूद भी वाहन चलाना और अन्य गंभीर कार्य को करना।
- इसको छोड़ने के प्रयासों में विफल रहना।
- किसी भी प्रकार की दवाइयों का निश्चित समय की तुलना में लंबी अवधि तक दवा का सेवन करना

 राजधानी में 16 फीसदी लोग विभिन्न प्रकार का नशा करते हैं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने आ रहे 10 फीसदी मनोरोगियों में नशे की गंभीर लत होती है। एम्स के राष्ट्रीय औषध निर्भरता उपचार केंद्र द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक राजधानी में करीब 16 फीसदी लोग विभिन्न प्रकार के नशे करते हैं। 

इसमें सबसे ज्यादा लोग शराब के गंभीर लती पाए गए हैं। इसके अलावा 10 % लोग भांग, 7% लोग अफीम व चरस आदि और 4% लोग नशीली गोलियों या इंजेक्शन से होने वाले नशे की लत में फंसे हुए हैं। सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में करीब 70 हजार स्ट्रीट चिल्ड्रेन (सड़क पर जीवन यापन करने वाले बच्चे) भी कई प्रकार का नशा करते हैं।

6% महिलाएं भी शराब का करती हैं सेवन
सर्वे में में बताया गया है कि दिल्ली की कुल आबादी के 27.3 फीसद पुरुष और 6.4 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करते हैं। 
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