दिल्ली में 100 करोड़ की ठगी: एप से सिस्टम करते थे ठप, अमेरिका वालों को लगाते थे चूना; दो साल तक चला फर्जीवाड़ा
दिल्ली में 100 करोड़ की ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ है। ये लोग अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे। एप के जरिए सिस्टम को ठप कर मदद करने का झांसा देकर ठगी करते थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बाहरी जिला पुलिस ने पश्चिम विहार इलाके में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर करीब सौ करोड़ की ठगी करने वाली एक महिला समेत 12 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाते थे। वह एप के जरिए उनके सिस्टम को ठप करने के बाद मदद करने के बहाने उनसे अमेरिकी डॉलर में उगाही कर लेते थे।
आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट का इंजीनियर बताकर मदद करने का आश्वासन देकर रकम हासिल करते थे और फिर पीड़ितों के नंबर को ब्लॉक कर देते थे। इनके कब्जे से पुलिस ने 16 लैपटॉप, 12 लैपटॉप चार्जर, 2 वाईफाई राउटर, 9 हेड फोन और 13 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
दो साल से चला रहे थे फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिले के वाहन चोरी निरोधक शाखा को सूचना मिली कि पश्चिम विहार के मादीपुर इलाके में कुछ लोग फर्जी कॉल सेंटर चला रहें हैं। जिसके जरिए वह अमेरिकी नागरिकों से ठगी कर रहे हैं।
निरीक्षक प्रवीण कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सूचना को पुख्ता करने के बाद नौ मई की सुबह मादीपुर इलाके में स्थित एक मकान पर दबिश दी। वहां पर एक महिला समेत 12 लोग ठगी को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया।
ज्यादातर दिल्ली से हैं जालसाज
आरोपियों की पहचान विकासपुरी निवासी साहिल चटवाल, लाडपुर निवासी नवीन डबास, दिल्ली कैंट निवासी रविंदर, जहांगीरपुरी निवासी पीयूष, चंदर विहार निवासी गौतम, मुरादाबाद यूपी निवासी आकाश, विजय विहार निवासी जफरशाह, बुध विहार निवासी सुभाष, राजौरी गार्डन निवासी लवीश, न्यू लॉयर्स कॉलोनी आगरा यूपी निवासी ऋषभ, लखीमपुर खीरी यूपी निवासी शरद और एक महिला के रूप में हुई है।
अमेरिकी नागरिकों को बनाते निशाना
जांच करने पर पता चला कि आरोपी ऐप्स बीएसओडी, गूगल वॉयस, ब्राउज़र लॉगिन, माइक्रो एसआईपी के माध्यम से नेट कॉलिंग के माध्यम से अमेरिका के लोगों से ठगी कर रहे थे। आरोपी एप के जरिए अमेरिका में रह रहे नागरिकों के सिस्टम को ठप कर देते थे। उसके बाद पीड़ित के सिस्टम पर मदद के लिए आरोपियों का नंबर आने लगता था।
पीड़ितों के संपर्क करने पर आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट का इंजीनियर बताते थे। उनकी मदद करने के लिए अमेरिकी डॉलर की मांग करते थे। रकम आने के बाद आरोपी पीड़ितों का नंबर ब्लॉक कर देते थे।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस अधिकारी ने बताया कि गैंग का सरगना साहिल चटवाल है, जो अपने साथी नवीन डबास के साथ पिछले दो साल से यहां पर फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपी एक माह में करीब पांच करोड़ रुपये की ठगी कर रहे थे। पुलिस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों की जांच कर रही है।