एक्सक्लूसिवः देश की राजधानी में 110 ब्लैक स्पॉट, रोज रहता है हादसों का खौफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुलिस ने सड़क हादसों के 110 ऐसे स्थान चिन्हित किए हैं, जहां वाहन चालक की जरा सी चूक से दुर्घटना हो जाती है। इन स्थानों पर खराब इंजीनियरिंग और वाहनों का अतिरिक्त भार हर दिन हादसों को दावत दे रहा है। इसमें आईएसबीटी कश्मीरी गेट, मुकुंदपुर, शास्त्री पार्क, वजीराबाद, पीरागढ़ी सरीखे उन इलाकों में दुर्घटना की आशंका ज्यादा रहती है, जहां लोगों की भीड़ ज्यादा है। यह सभी प्वाइंट ट्रैफिक जंक्शन के तौर पर इस्तेमाल होते हैं। वाहनों की अदला-बदली के लिए होने वाली भागमभाग के बीच कई बार लोग हादसे के शिकार हो जाते हैं।
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि ब्लैक स्पॉट की पहचान कर इसकी डिजाइन में बदलाव और यात्रियों की सहूलियत के लिए अतिरिक्त सुविधाएं तैयार करने की सिफारिश पीडब्ल्यूडी को की गई है। इससे हादसों को सीमित किया जा सकता है। वहीं, दिल्ली सरकार का कहना है कि दिल्ली की बड़ी सड़कों की रि-डिजाइन की जा रही है। इस प्रोजेक्ट में ब्लैक स्पॉट को खत्म करने पर जोर है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद साल भर के भीतर आवाजाही बेहतर हो जाएगी।
इन 5 स्थान पर सबसे अधिक होते हैं सड़क हादसे
- कश्मीरी गेटः मौत-10, सामान्य हादसे-14, कुल-24
- मुकुंदपुर चौकः मौत-8, सामान्य हादसे-16, कुल-24
- शास्त्री पार्कः मौत-5, सामान्य हादसे-17, कुल-22
- वजीराबादः मौत-6, सामान्य हादसे-16, कुल-22
- पीरागढ़ी चौकः मौत-5, सामान्य हादसे- 15, कुल-20
आए दिन हो रहे हादसे
देश की राजधानी में हो रहे आए दिन हादसों के बाद ट्रैफिक पुलिस भी ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां सुधार लाने का प्रयास कर रही है। पिछले साल दिल्ली में जो इन स्थानों पर हादसे हुए उनमें 44' हिट एंड रन के केस हुए हैं जो पैदल रास्ता पार रहे थे। पुलिस ने अपनी एक रिसर्च में ये पाया कि प्राइवेट कार और टैक्सी सबसे ज्यादा हादसे को अंजाम दे रहे हैं। इसके बाद दूसरे नंबर दो पहिया गाड़ी आते हैं।
साइकिल वाले भी हुए शिकार
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, साइकिल से चलने वालों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा केस सुबह के समय के हैं। वजीराबाद और कश्मीरी गेट पैदल चलने वालों के लिए सबसे खतरनाक साबित हुए हैं। वहीं, सबकी बात की जाए तो रिंग रोड और आउटर रिंग रोड पर भी हर दिन हादसे हो रहे हैं। यहां अचानक से लूप लेने पर टर्न लेने वालों की वजह से हादसे सामने आ रहे हैं।
दूसरी संस्थाएं भी कर रही काम
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि सड़क हादसों को रोकने के लिए दिल्ली सरकार व पुलिस के साथ दूसरी संस्थाएं भी काम कर रही है। कंद्रीय सड़क रिसर्च संस्था की इसके लिए मदद ली जा रही है। ज्यादातर रास्तों पर खराब इंजिनियरिंग की हादसों की मुख्य वजह सामने निकल आ रही है।
-रविकांत सिंह, सड़क-परिवहन विशेषज्ञ
2019 में साल 2018 के मुकाबले हादसों में कमी आई
दिल्ली में 2019 में सड़क हादसों में 14 प्रतिशत की कमी आई और 2018 की तुलना में बीते साल सड़क हादसों में 226 कम लोगों की मृत्यु हुई।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी। आंकड़े दर्शाते हैं कि राष्ट्रीय राजधानी में पिछले साल 5,601 सड़क हादसे हुए जिनमें 1,508 लोग मारे गये और 4,949 अन्य घायल हो गये। जबकि 2018 में 6,517 सड़क दुर्घटनाओं में 1,734 लोगों की मृत्यु हो गई है।
दिल्ली सरकार सड़कों की कर रही री-डिजाइन
राजधानी दिल्ली की 100 फीट चौड़ी, 500 किलोमीटर लंबी सड़कें यूरोपीय शहरों की तरह खूबसूरत व आम लोगों के अनुकूल बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली की 7 सड़कों के री-डिजाइन करने की योजना को पहले ही मंजूरी दी थी। अधिकारियों का कहना है कि सीधे मुख्यमंत्री की निगरानी में चल रहे इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद हादसों की संख्या कम हो जाएगी। साथ ही ट्रैफिक जाम से भी छुटकारा मिलेगा।