100 दिन में केजरीवाल से कहां हुई चूक, कहां गाड़े झंडे
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भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से जन्म लेने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद से राजधानी राजनीति की नई प्रयोगशाला बन गई है। अधिकारियों की नियुक्ति पर एलजी व अब केंद्र से राज्य सरकार के सीधे टकराव से देश-विदेश में यह चर्चा चल रही है कि दिल्ली का संकट संवैधानिक है या राजनीतिक।
बहरहाल, आज सरकार के 100 दिन पूरे हुए हैं और इस दौरान कई वादे पूरे करने के अलावा प्रदेश सरकार विवादों के शतक के भी करीब है। केंद्र से टकराव अभी सुलझा नहीं है यानि पिक्चर अभी बाकी है...।
दूसरी बार ऐतिहासिक बहुमत से सत्ता में आने के बाद यह भी सही है कि बिजली-पानी के दाम घटाने सहित कई मामलों पर उसने खजाने का मुंह खोल दिया लेकिन विवाद भी उसके साथ शुरू से ही जुड़ गए।
कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते केजरीवाल
कुछ दिन पहले पुलिस आयुक्त से ट्रांसफर-पोस्टिंग की सूचना दिल्ली सरकार के मांगने के बाद केंद्र से टकराव की सुगबुगाहट शुरू हुई और मुख्य सचिव के छुट्टी पर जाने के बाद कार्यवाहक मुख्य सचिव के मुद्दे पर सरकार व एलजी में ठन गई।
दोनों पक्षों के बीच चिट्ठी वार के बीच टकराव बढ़ता गया और एलजी ने दिल्ली सरकार द्वारा की गई नियुक्तियों को रद्द कर दिया। पहले एलजी व मुख्यमंत्री को बातचीत से विवाद निपटाने की सलाह देने वाले गृह मंत्री राजनाथ सिंह के मंत्रालय ने एलजी को सही ठहराने वाली अधिसूचना जारी कर दी।
अब यह विवाद फिलहाल निपटता नहीं दिख रहा है, भले ही इसमें जनता का नुकसान हो। कल मोदी मथुरा में रैली को संबोधित करेंगे तो अरविंद केजरीवाल कनॉट प्लेस में कैबिनेट के साथ लोगों के बीच होंगे, जिसमें कोई भी एंट्री कर सकेगा। ऐसे में तमाम विवादों के बीच राजनैतिक माइलेज लेने का कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते।
दिल्ली ने क्या खोया, क्या पाया ?
100 दिनों में क्या नहीं दिया- लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं व जनलोकपाल बिल पर भी अभी प्रगति नहीं, मुफ्त वाईफाई नहीं, कोई नया अस्पताल नहीं, दिल्ली सरकार के अधीन विवि व संस्थानों में सीटें नहीं बढ़ी, नए स्कूलों के निर्माण में भी कोई खास प्रगति नहीं, डीटीसी बसों में मार्शल व सीसीटीवी नहीं, बिजली-पानी को लेकर संकट जारी आदि शामिल रहे।
इन विवादों में उलझी रही सरकार- अधिकारियों की पोस्टिंग-ट्रांसफर सहित कई मुद्दों पर उपराज्यपाल व केंद्र से सीधा टकराव, मीडिया के दिल्ली सचिवालय में रोक पर टकराव, किसान रैली में मुख्ममंत्री की मौजूदगी में किसान की पेड़ पर लटककर खुदकुशी, दिल्ली सरकार के कानून मंत्री का फर्जी डिग्री मामला, विधायकों पर मारपीट के दर्ज मुकदमे, दिल्ली महिला आयोग से टकराव, विपक्ष के नेता का दर्जा देने का मामला, आप नेता योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण से पार्टी में चल रहे घमासान में विपक्ष का सरकार के उलझने का आरोप आदि शामिल रहे।