'छोटे-छोटे पिंजरों में रखी 1.5 लाख मुर्गियां, पंख तक नहीं फैला सकती'
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मुर्गियों को छोटे पिंजरों में रखने के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह मुर्गियों के प्रति चरम स्तर पर क्रूरता है।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष यह जनहित याचिका भारतीय पशु संरक्षण संगठनों की फेडरेशन ने दायर की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक खेत में छोटे-छोटे पिंजरों में करीब 1.5 लाख मुर्गियों को रखा गया है।
'यूरोपअपनाया जा रही पिंजरा मुक्त प्रणाली'
याचिका में कहा गया है कि एक मुर्गी को ए-4 साइज के कागज पत्र के बराबर स्थान दिया गया है। इसमें वे पंख तक नहीं फैला सकती।
वहीं यूरोप में पिंजरा मुक्त प्रणाली को अपनाया जा रहा है ताकि मुर्गियां चारों ओर अपने पंख फैला सके।
याचिका में इसे मुर्गियों के प्रति क्रूरता बताते हुए इस प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई 5 दिसंबर तय की है।