भाई-भाभी के हत्यारे छोटे भाई को मिली मौत की सजा, रची थी इतनी खौफनाक साजिश कि पढ़कर रूह कांप जाए
तीन साल पहले रानीपुर क्षेत्र के गोविंदपुर दादूपुर गांव में हुए दोहरे हत्याकांड में एडीजे चतुर्थ वरुण कुमार ने सगे भाई-भाभी का बेरहमी से कत्ल करने वाले छोटे भाई को फांसी की सजा सुनाई है।
अदालत ने अभियुक्त को मासूम भतीजी की हत्या के प्रयास का भी दोषी ठहराते हुए 71 हजार का जुर्माना भी लगाया है। हरिद्वार की किसी अदालत ने लंबे समय बाद फांसी की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता अनिल राणा ने बताया कि घटनाक्रम के अनुसार, गोविंदपुर दादूपुर निवासी शहजाद पुत्र सलीम का जम्मू-कश्मीर में जड़ी-बूटी से जुड़ा व्यवसाय था। शहजाद ने छोटे भाई सरताज को किसी काम के लिए 50 हजार उधार दिए थे। 24 सितंबर वर्ष 2016 को जम्मू-कश्मीर जाने के लिए शहजाद ने सरताज से रकम वापस मांगी।
पहले तो सरताज ने रकम देने में असमर्थता जताई, मगर शहजाद के दबाव बनाने से बौखलाए सरताज ने घर में ही चाकू से वार कर भाई की हत्या कर दी। विरोध में आई भाभी को भी सरताज ने मौत के घाट उतार दिया। उसने चार साल की मासूम भतीजी खुशी पर भी जानलेवा हमला किया, मगर उसकी जान बच गई।
इस दौरान शोरगुल सुनकर मौके पर पहुंचे पड़ोसियों ने सरताज को कमरे में बंद कर सूचना पुलिस को दे दी। सूचना पाते ही कोतवाली प्रभारी रहे प्रदीप बिष्ट ने सरताज को गिरफ्तार कर लिया।
ममले में पड़ोसी आरिफ ने आरोपी सरताज के खिलाफ केस दर्ज कराया था। तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन था। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 16 गवाह पेश किए गए।
दोनों पक्षों के साक्ष्यों के आधार पर एडीजे चतुर्थ वरुण कुमार ने अभियुक्त सरताज को भाई-भाभी की हत्या और मासूम भतीजी की हत्या करने के प्रयास का दोषी पाया। उन्होंने अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई और अर्थदंड के तौर पर 71 हजार का जुर्माना भी लगाया।
दोहरे हत्याकांड ने सबको हिलाकर रख दिया था
दोहरे हत्याकांड का मंजर बेहद वीभत्स था। घर के आंगन में खून से लथपथ दंपति की लाशें क्रूरता की दास्तां बयां कर रही थीं। एक बारगी हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया था। वहीं, हत्या के बाद आरोपी नहा धोकर फरार होने की ही तैयारी में था, लेकिन पड़ोसियों उसे घर में ही कैद कर दिया। तब हर कोई यह बात सुनकर सन्न रह गया था कि महज 50 हजार के लिए कोई अपनों का इतनी बेरहमी से कत्ल कैसे कर सकता है।
वारदात के दिन सरताज के सिर पर खून सवार था। लिहाजा उसने खून के रिश्तों की भी परवाह नहीं की। वह बस अपने भाई को मौत की नींद सुलाने की ठान चुका था। गनीमत थी कि चीख पुकार सुनकर पड़ोसियों की नींद खुल गई, वरना मासूम खुशी की भी जान चली जाती। उस दौरान दोहरे हत्याकांड ने पूरे आसपास के क्षेत्र को हिलाकर रख डाला था।
पुलिस की विवेचना से अंजाम तक पहुंचा केस
दोहरे हत्याकांड के दोषी को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में स्थानीय पुलिस का विशेष योगदान रहा। तब कोतवाली प्रभारी रहे प्रदीप बिष्ट ने पूरे केस को बेहद गंभीरता से लेते हुए विवेचना की बागडोर संभाली।
सरताज के खिलाफ एक-एक कर कई सबूत एकत्र किए। घटनास्थल से भी कई अहम साक्ष्य जुटाए। दोहरे हत्याकांड में गवाहों की भी लंबी चौड़ी सूची तैयार की। उसी का नतीजा है कि पुलिस की मजबूत पैरवी के चलते दोहरे हत्याकांड के दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई।