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युवा मोटे अनाज की खेती करें तो कमा सकते हैं लाखों : कैलाश

Mon, 15 May 2023 01:52 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 15 May 2023 01:52 AM IST
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Youth can earn millions if they cultivate coarse grains: Kailash
आजकल के युवा सिर्फ नौकरी करना चाहते हैं, किसानी की तरफ ध्यान नहीं देते। ऐसा नहीं है कि किसानी में अच्छी पैदावार नहीं है। युवा अगर नई तकनीक से मोटे अनाज की खेती करता है तो साल में 80 लाख या एक करोड़ तक कमा सकता है। विभिन्न बीमारियों के बचाव में फायदेमंद मोटे अनाज से बिस्किट से लेकर अन्य खाद्य पदार्थ भी बनने लगे हैं।
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रविवार को हाथीबड़कला स्थित सर्वे ऑफ इंडिया परिसर में श्री अन्न (मिलेट्स) महोत्सव 2023 के दूसरे दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने यह बात कही। महोत्सव के दूसरे दिन भी दूरदराज से आए किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान मेले में अलग-अलग विभागों से स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें मिलेट्स को बढ़ावा देने की बात की जा रही है। यह नहीं कार्यक्रम में खेती, किसानी और बागवानी से जुड़े विभिन्न तकनीकी उपकरणों के स्टॉल भी लगाए गए।
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नेचुरल खेती को देना होगा बढ़ावा
कैलाश जोशी ने कहा कि पहले मोटे अनाज का नाम आते ही लोग सोचते थे कि मोटा अनाज खाने से मोटे हो जाएंगे, लेकिन आज डॉक्टर भी मोटे अनाज पर जोर देते हैं, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। केमिकल से मुक्ति के लिए नेचुरल खेती को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में सभी पंचायत नेचुरल खेती से जुड़ जाएंगी।
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पांच गुना तक बढ़ चुका कृषि का बजट
कैलाश चौधरी ने पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले तक कृषि का बजट अधिकतम 23 हजार करोड़ के आसपास रहा, लेकिन आज कृषि का बजट एक लाख 25 हजार करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा किसानों की छवि बदलनी होगी। अबतक कहानियों और फोटो में किसान की जो इमेज दिखाई गई है उसमें एक गांव में किसान रहता था वह बहुत गरीब था। केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद से किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।

हिमालयी उत्पाद की करनी होगी ब्रांडिंग
उत्तराखंड कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि श्री अन्न हमारे उत्तराखंड की परंपरा खेती में है। आज स्वयं सहायता समूह की तमाम महिलाएं भी इससे जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में स्टेट मिलेट मिशन के तहत 73 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन में गहत व काला भट्ट फसल के सत्यापित बीज के प्रयोग की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध भी किया।वहीं, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि पूरी दुनिया में मोटे अनाज को बढ़ावा सिर्फ हिंदुस्तान ने दिया है। उन्होंने कहा कि हिमालय के उत्पाद की भी ब्रांडिंग करनी होगी। यह उत्पाद लाखों बीमारियों को ठीक करने में कारगर है।


झंगोरा की खीर, मंडवे की रोटी आ रही पसंद
मेले में लगे स्टॉल में लोगों ने बताया कि मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू से बनी हुई खाद्य सामग्री फायदेमंद होने के साथ खासी पसंद की जा रही है। वहीं, एलोवेरा खीर, पहाड़ी मोमोज, झंगोरा का पुलाव, कंगनी से बनी ठंडाई, झंगोरा की खीर, मंडवे की रोटी, कोदू के नूडल्स, खांड के लड्डू का लोगों को पसंद आ रहे हैं।


कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में हरियाणा के कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल, सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, कृषि सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम, निदेशक गौरी शंकर, सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल, जोगेंद्र पुंडीर, चौधरी अजीत सिंह, सुरेंद्र राणा आदि मौजूद थे।
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