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आपदा से बचना है तो सुधारना होगा सिस्टम
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 26 Mar 2014 07:39 PM IST
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प्रदेश में जून 2013 में आई आपदा और इसके बाद भारतीय हिमालय क्षेत्र के लिए सीख विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आए विशेषज्ञों ने आपदा से बचने के लिए मजबूत सिस्टम के साथ ही पहाड़ में निर्माण कार्यों पर भी सवाल खड़ा किया।
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कुंजवाल ने किया उद्धाटन
एफआरआई में जर्मन तकनीकी सहयोग के उत्तराखंड क्षेत्रीय आर्थिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत सेंट्रल हिमालयन इनवायरमेंट एसोसिएशन और सेंटर फोर इकोलॉजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने किया।
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इस मौके पर परियोजना के प्रबंधक सुब्रतो राय ने कहा कि आपदा के विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन करते हुए जो दस्तावेज तैयार किए गए हैं, उन्हें अब भारतीय हिमालयी क्षेत्रों के अन्य राज्यों से भी साझा किया जाना चाहिए।
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शोध और सामाजिक पहलुओं के बीच हो तालमेल
एफआरआई के निदेशक डा. पीपी भोजवैद ने शोध और सामाजिक पहलुओं के बीच तालमेल के साथ आपदाओं के प्रभाव को कम करने पर बल दिया।
गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने कहा कि इकोलॉजी और इंजीनियरिंग के बीच समन्वय होना चाहिए ताकि भूस्खलन जैसी दिक्कतों से बचा जा सके।
कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति प्रो. बीके जोशी ने शासकीय संवेदनशीलता व जिम्मेदारी पर चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अभिकरण के दिशा निर्देशों को, राज्य विशेष की स्थानीय आवश्यकताओं को समाहित करते हुए लागू करना चाहिए।
आपस में हो ज्ञान का आदान प्रदान
चमन लाल ढांडा ने आपदा प्रबंधन समेत अन्य विकसित देशों के साथ ज्ञान कौशल के आदान प्रदान के बारे में बताया। डा. पुश्किन फर्त्याल ने कहा कि उत्तराखंड आपदा एक स्पष्ट संदेश हिमालयी क्षेत्रों से प्रभावित होने वाली बहुमूल्य पर्यावरणीय सेवाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए दिया है।
वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डा. पीएस नेगी ने कहा कि अत्यधिक निर्माण कार्य भी इस आपदा की एक वजह है। इस लिहाज से विशेषज्ञों की सहायता लेकर निर्माण किए जाएं।
मौसम विभाग के निदेशक आनंद शर्मा ने कहा कि चौराबाड़ी ग्लेशियर के बजाए भारी बारिश से यह नुकसान हुआ था। फिर भी यदि चेतावनी सिस्टम मजबूत किया जाए तो बेहतर होगा। इस अवसर पर भारी संख्या में विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कमाई वाली नियत के हो गए नेता, अधिकारी
कार्यशाला का शुभारंभ करने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि आज के समय में नेता, अफसर और सामाजिक कार्यकर्ता कमाई वाली सोच के हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की आपदाएं हर साल आती रहती हैं। जरूरत है इससे होने वाले नुकसान को कम करने की। मशीनों के अत्यधिक प्रयोग ने विकास में लगने वाला समय तो कम कर दिया है लेकिन इससे पहाड़ को खतरा बढ़ा है, बेरोजगारी भी बढ़ी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत के आपदा से मिलने वाले धन को विकेंद्रीयकरण करने के कदम को अच्छा बताया।