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सब जानती है उत्तराखंड की 'वंडर गर्ल' ख्याति
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Sat, 30 Nov 2013 08:46 PM IST
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मुकेश अंबानी इज दी चेयरमैन ऑफ रिलायंस इंडस्ट्रीज। कतर इज कैपिटल ऑफ दोहा। जन गण मन इज अवर नेशनल ऐंथम।
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यह जवाब सात-आठ साल के बच्चे के नहीं है। बल्कि तीन साल और चार माह की ख्याति के हैं। जिस उम्र में बच्चे साफ नहीं बोल पाते, ख्याति का प्राउनेनसेशन (उच्चारण) और जवाब बिल्कुल सटीक है।
मनोज सेमवाल और सुनीता सेमवाल की यह प्रतिभाशाली बच्ची ने दो-तीन माह पूर्व ही स्कूल जाना शुरू किया है।
लेकिन अपनी प्रतिभा से वह बड़ी कक्षाओं के बच्चों को भी हैरान कर देती है।
एक बार बताने पर सब याद
ख्याति की माता सुनीता बताती हैं कि उसने पौने दो साल से बोलना शुरू किया। तब घर पर काम करते हुए ख्याति हर चीज के बारे में पूछती थी। एक बार बताने पर ही उसे याद हो जाता था। उसमें इस प्रतिभा को देख उन्होंने उसको हिंदी-अंग्रेजी वर्ड मीनिंग और सामान्य ज्ञान बताना शुरू किया।
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एक बार बताने के बाद उसे दोबारा बताने की जरुरत नहीं पड़ी। आज ख्याति को मिट्टी से लेकर आकाश और पेड़ के जड़ से लेकर पत्तियों तक के नाम याद हैं। देश-प्रदेश की राजधानियों के नाम वह पल भर में बोल देती है।
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एडमिशन के वक्त ख्याति के जवाब सुनकर आभास हो गया था, यह बच्ची कुछ अलग है। उसको बेहतर प्लेटफार्म मिले, इसके लिए भविष्य में क्या किया जा सकता है, यह देखा जा रहा है।
-डीएस रावत, प्रधानाचार्य अनूप मैमोरियल स्कूल
ख्याति पर नर्सरी कक्षा के मुताबिक मेहनत करने की जरुरत नहीं पड़ती। उसका आईक्यू लेवल बड़े बच्चों के समान है।
-निर्मला भट्ट, क्लास टीचर
ऐसे बच्चों को गिफ्टेड कहा जाता है। इनका आईक्यू लेवल बेहतर होता है। शार्प मैमोरी होती है। ख्याति के मेंटल लेवल के मुताबिक शिक्षा उसको दी जानी चाहिए। स्कूल प्रबंधन को भी उसकी ऐबिलिटी चेक कर उसकी च्वाइस के मुताबिक फील्ड उपलब्ध कराना चाहिए। ताकि भविष्य में उसकी प्रतिभा का सही इस्तेमाल हो।
-डा. अजरा परवीन, सहायक प्रोफेसर, कुंमाऊं विश्वविद्यालय हल्द्वानी