हरिद्वार: गर्भवती संग नर्स ने की शर्मनाक हरकत, पैथोलॉजी लैब में हुआ बच्चे का जन्म
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महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स की लापरवाही एक गर्भवती महिला की जान पर आफत बन गई। महिला को चिकित्सक ने प्रसव के लिए लेबर रूम भेजा और नर्स ने ब्लड व यूरिन जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब भेज दिया।
महिला ने पैथोलॉजी लैब में ही बच्चे को जन्म दे दिया। गनीमत यह रही कि इस दौरान जच्चा बच्चा के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई। इतनी घोर लापरवाही करने के बाद भी अस्पताल प्रशासन स्टाफ नर्स के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बजाय मामले पर लीपापोती करते नजर आया।
शुक्रवार दोपहर को श्यामपुर क्षेत्र के कांगड़ी गांव की आशा पत्नी देशपाल को दर्द होने पर आशा कार्यकत्री प्रसव कराने के लिए महिला अस्पताल पहुंची। आशा कार्यकत्री ने महिला को ओपीडी में चिकित्सक को दिखाया।
चिकित्सक ने प्रसव कराने के लिए महिला को लेबर रूम में भेज दिया। लेबर रूम में तैनात स्टाफ नर्स ने महिला का बीपी चेक किया और ब्लड, एलएफटी, केएफटी, शुगर, यूरिन की जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब जाने को कहा।
बताया जाता है कि आशा कार्यकत्री महिला को लेकर पैदल ही जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब ले गई। यहां पहुंचते ही महिला का दर्द बढ़ गया। वहां ज्यादा मरीज होने के कारण जल्दी से सैंपल भी नहीं लिए जा सके।
वार्ड में ही लिया जाता है सैंपल
दर्द बढ़ने पर आशा वहीं फर्श पर लेट गई। महिला की हालात देखकर लैब के स्टाफ ने इसकी सूचना नर्सों को दी। वहीं बेंच पर लेटाकर महिला का प्रसव कराया गया। काफी देर बाद महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स, वार्ड आया वाहन लेकर वहां पहुंची। वह जज्जा और बच्चा को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। जहां दोनों को भर्ती कराया गया।
वार्ड में ही लिया जाता है सैंपल
आमतौर से प्रदेश के अधिकांश महिला अस्पताल में यह व्यवस्था कि किसी भी तरह की जांच के लिए सैंपल लेने के लिए लैब का कर्मचारी वार्ड में जाता है। जांच के बाद इसकी रिपोर्ट वहीं भेजी जाती है। हरिद्वार के महिला अस्पताल में ऐसी व्यवस्था नहीं। यहां भर्ती गर्भवती महिलाओं को खुद ही लैब तक जाना होता है। शुक्रवार को भी इसी व्यवस्था के चलते एक गर्भवती महिला को दिक्कतें उठानी पड़ी।
अस्पताल में लैब होने के बाद भी सभी जांच नहीं होती
महिला अस्पताल परिसर में पैथोलॉजी लैब है, लेकिन यहां एलएफटी और केएफटी की जांच नहीं होती। गर्भवती महिला को इन दोनों की जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी लैब का क्या फायदा जिसमें सभी तरह की जांच नहीं होती। अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भी महिलाओं को जिला अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं।
कांगड़ी गांव की गर्भवती महिला को ओपीडी में देखा और प्रसव के लिए लेबर रूम में भेजा था। हमारे अस्पताल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि गर्भवती महिलाओं का सैंपल लेने लैब का कर्मचारी आए। महिला की स्थिति को देखते हुए स्टाफ नर्स को उसे जिला अस्पताल नहीं भेजना चाहिए था। नर्स से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
- डा. भवानी पाल, सीएमएस, महिला अस्पताल।