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उत्तराखंड में महिला नहीं 'अबला' आयोग
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 28 Nov 2013 09:09 AM IST
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देहरादून से दिल्ली तक छाए हाई प्रोफाइल सेक्स स्कैंडल ने एक बार फिर महिला आयोग के अध्यक्ष की खाली कुर्सी का अहसास कराया है। चार फरवरी के बाद से राज्य में महिला आयोग केअध्यक्ष का महत्वपूर्ण पद खाली है।
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आयोग की सचिव मानती हैं कि अध्यक्ष के पास असीमित अधिकार होते हैं। इस तरह के किसी मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के साथ संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सरकार पर दबाव बनाकर कार्रवाई कराई जा सकती थी।
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महिलाओं से जुड़ी तमाम समस्याएं
राज्य महिला आयोग के पास सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा के आ रहे हैं लेकिन केदारघाटी आपदा के बाद महिलाओं से जुड़ी तमाम समस्याएं भी आ रही हैं। जिनके निस्तारण के लिए अध्यक्ष की अत्याधिक आवश्यकता होती है।
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वहीं जिन शिकायतों का निस्तारण जिला स्तर पर हो जाना चाहिए था उसके लिए महिलाओं को देहरादून तक दौड़ लगानी पड़ रही है। आयोग में वैसे तो मामलों का निस्तारण हो रहा है लेकिन सैकड़ों की संख्या में मामले अध्यक्ष की मुहर का इंतजार कर रहे हैं।
महिला आयोग की सचिव सुजाता सिंह का कहना है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में महिला आयोग की अहम भूमिका होती है। अध्यक्ष खुद ही मामलों में संज्ञान लेकर कार्रवाई का दबाव बना सकती हैं। वहीं न्याय के लिए महिला सीधे भी आयोग में अर्जी दे सकती है।
योजनाओं को लागू कराने में दिक्कत
कहती हैं यूं तो आयोग का कामकाज चल रहा है लेकिन अध्यक्ष के पास पावर होती जिससे कोई निर्णय या योजनाओं को लागू कराने में दिक्कत आती है। अध्यक्ष केन होने आयोग केजिलों के सदस्य भी नहीं हैं। लिहाजा दूर दराज इलाकों में जिलों के सदस्यों के माध्यम से अध्यक्ष जनसुनवाई कर मामलों का निस्तारण कर देती हैं। अब महिलाओं को यहां आना पड़ता है।
महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष संतोष चौहान भी मानती हैं कि अध्यक्ष के न होने से कोरम पूरा नहीं होता। साथ ही महत्वपूर्ण फैसलों पर निर्णय लटकेरहते हैं। आयोग के प्रति महिलाओं में जागरूकता आई है लिहाजा शिकायतों की संख्या भी बढ़ी है।
सरकार अनदेखी कर रही है
फरवरी में कार्यकाल समाप्त कर चुकी पूर्व अध्यक्ष सुशीला बलूनी का कहना है जिस राज्य को महिलाओं ने बनाया सरकार उन्हीं की अनदेखी कर रही है। सरकार ने कान में रुई डाल रखी है। महिला उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता को आयोग से बहुत उम्मीद होती है। किसी मामले में अध्यक्ष के हस्ताक्षर के बाद ही सदस्य सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे मे अकेले सदस्य सचिव क्या कर सकती है।