उत्तराखंड : पिछले 12 घंटे खासे राहत वाले, पूरे प्रदेश में वनाग्नि के केवल सात मामले
वनाग्नि के कुल सात ही मामले सामने आए और करीब 2.88 हेक्टेयर वन क्षेत्र ही प्रभावित हुआ। अप्रैल में वनाग्नि के यह सबसे कम मामले हैं।
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जंगल की आग के मामले में वन विभाग के लिए पिछले 12 घंटे खासे राहत वाले रहे। वन विभाग की ओर से जारी फायर बुलेटिन के मुताबिक वनाग्नि के कुल सात ही मामले सामने आए और करीब 2.88 हेक्टेयर वन क्षेत्र ही प्रभावित हुआ। अप्रैल में वनाग्नि के यह सबसे कम मामले हैं।
नई टिहरी के जंगलों में देर रात भीषण आग लग गई। यह आग एक हेक्टेयर जंगल में फैल गई। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम आग बुझाने में जुट गई।
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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को गढ़वाल मंडल में छह और कुमाऊं मंडल में जंगल की आग का कुल मिलाकर एक ही मामला रिपोर्ट किया गया। कुमाऊं में आरक्षित वन क्षेत्र में एक भी मामला सामने नहीं आया। गढ़वाल मंडल के आरक्षित वन क्षेत्र में कुल मिलाकर चार मामले सामने आए।
अप्रैल में अभी तक का यह सबसे कम नुकसान है। पिछले नौ दिनों में वनाग्नि के कुल 757 मामले सामने आए थे और 1188 हेक्टेयर क्षेत्र जंगल की आग से प्रभावित हुआ था। वन विभाग का मानना है कि सक्रिय आग के मामलों पर नियंत्रण पाने और नए मामले सामने न आने के कारण यह संभव हो पाया है।
वन विभाग का अनुमान है कि दो तीन दिन अब बारिश नहीं होने पर फिर से कई और मामले सामने आ सकते हैं। 12 अप्रैल से फिर बारिश का अनुमान है और दो दिन में आग के मामलों को नियंत्रित रखा गया तो नुकसान पर बहुत हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी का कहना है कि वनाग्नि के मामलों को लेकर लगातार सतर्कता बरती जा रही है। प्रभागीय वन अधिकारियों के स्तर पर निगरानी की जा रही है और नोडल अधिकारियों को भी कहा गया है कि क्रू स्टेशनों का मौका मुआयना करें।
डीडीहाट में आग बुझाते खाई में गिरकर युवक की मौत
पर्वतीय क्षेत्रों में जंगल की आग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जंगलों की आग को काबू पाने में वन विभाग का पसीना छूट रहा है। वन विभाग के साथ स्थानीय लोग भी आग बुझाने में जुटे हैं। डीडीहाट में अठक्वाली के जंगल में लगी आग को बुझाने के दौरान पंकज देऊपा (19) पुत्र नंदन सिंह देऊपा का पैर फिसल गया और 500 मीटर गहरी खाई में गिरने से उसकी मौत हो गई। खाई में भी भीषण आग लगी हुई थी, जिस कारण उसका चेहरा, पैर और छाती बुरी तरह झुलस गए थे।
इधर, शुक्रवार शाम मां पूर्णागिरि धाम में ठुलीगाड़ क्षेत्र के जंगल में आग लगी जबकि शनिवार सुबह शारदा टापू का जंगल धधक उठा। पुलिस, जिला पंचायत कर्मियों और वहां मौजूद युवाओं ने सूझबूझ से आग फैलने से रोकी। शारदा टापू की आग अग्निशमन विभाग ने बुझाई।
कनालीछीना विकासखंड के गुड़ौली गांव तक पहुंची जंगल की आग से सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान जल गई। इस अग्निकांड में राशन और दस्तावेज जल गए। भवन के प्रथम तल पर रखा लाखों के शटरिंग का सामान भी जल गया। आग से लाखों की क्षति हुई है। हालांकि, आग की चपेट में आने से डाकघर सहित अन्य दुकानों को बचा लिया गया। इधर, मूनाकोट और गैना के जंगल तीसरे दिन भी जलते रहे। ज्याल बौसड़ा क्षेत्र में आग की लपटों ने वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया। आग की चपेट में गैना जंगल भी बुरी तरह जल गया।
थल (पिथौरागढ़) से मिली जानकारी के मुताबिक लेजम के कमद वन पंचायत में शुक्रवार शाम लगी आग ने पूरे वन क्षेत्र में को अपनी आगोश में ले लिया। रातभर जंगल जलता रहा, लेकिन इस आग बुझाने के लिए कोई नहीं आया। एक ही वन कई बार जल रहे हैं। अल्मोड़ा में दो स्थानों पर जंगल की आग की घटनाएं हुईं। इसके बाद शहर में फिर से प्रदूषण बढ़ गया है। शनिवार को कर्नाटक खोला और सरकार की आली क्षेत्र के जंगलों में आग लग गई।
शुक्रवार की देर शाम कौसानी वन पंचायत के जंगल में भीषण आग लग गई। उधर, कपकोट के शिखर की पहाड़ी में भी आग लगने से वनस्पति को खासा नुकसान पहुंचा है। जंगलों की वातावरण में एक बार फिर वातावरण में धुंध छा गई है। दृश्यता कम हो गई है। नगर पालिका क्षेत्र चिलियानौला के जंगल में शुक्रवार देर शाम अचानक आग भड़क गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और चारों तरफ से जंगल को अपनी चपेट में ले लिया।