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उत्तराखंड में तीन लोगों को मौत के घाट उतारने वाला जंगली हाथी अब ‘पालतू’, ऐसे सुधारा

Fri, 17 May 2019 01:58 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal हिमांशु भट्ट, अमर उजाला, हरिद्वार
हिमांशु भट्ट, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 17 May 2019 01:58 PM IST
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wild elephant who killed three people is now pet
फाइल फोटो

तीन लोगों को मौत के घाट उतारने वाला बिगडै़ल जंगली हाथी अब उत्पाती नहीं रहा। उसे ट्रेनिंग से सुधार दिया गया है। असम के चार महावतों ने पांच माह तक प्रशिक्षण देने के बाद हाथी को पालतू बना दिया है। अब इस हाथी को वन्यजीव सुरक्षा के तहत गश्त के काम में लगाया जाएगा। बीते डेढ़ वर्ष से भेल में एक 16 साल के बिगड़ैल टस्कर हाथी का खौफ तारी था। हाथी ने भेल में ही तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। बीते वर्ष 14 नवंबर को टस्कर ने एक भेलकर्मी को पटककर मार डाला था। जिसके बाद हरिद्वार से देहरादून तक हड़कंप था।

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कड़ी मशक्कत के बाद राजाजी टाइगर रिजर्व और हरिद्वार वन प्रभाग की संयुक्त टीम ट्रैंकुलाइज कर हाथी को टाइगर रिजर्व के मीठावाली कैंप में ले गई थी। यहां चिकित्सकों ने हाथी के स्वास्थ्य की जांच की। विशेषज्ञों की टीम हाथी के स्वभाव का पता लगाने में जुट गई। यहां हाथी को प्रशिक्षित करने के लिए बीते जनवरी माह में क्रॉल (लकड़ी का बाड़ा) बनाया गया। प्रशिक्षण देने के लिए असम से बुलाए गए चार महावतों को करीब पांच  माह तक चले प्रशिक्षण के बाद इसे पालतू बनाने में कामयाबी मिली। अब हाथी को मीठावाली कैंप से चीला रेंज में ले आया गया है।
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अमूमन खूंखार होने के बाद वन्यजीवों को मार दिया जाता है, लेकिन वन विभाग ने ऐसा नहीं किया। कई संगठनों ने इस बीच विभाग पर आरोप जड़ते हुए उसे छोड़ने के लिए दबाव भी बनाया, लेकिन उसके फिर से आबादी वाले इलाके में प्रवेश करने की आशंका के मद्देनजर ऐसा नहीं किया गया। आखिर हाथी को प्रशिक्षित करने की वन विभाग की योजना रंग लाई। 
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‘राधा’ और ‘रंगीली’ की ली मदद
टस्कर को मीठावाली कैंप में ही रोके रखने के लिए वन विभाग ने दो हथिनियों ‘राधा’ और ‘रंगीली’ की भी सहायता ली।  तीन लोगों की जान लेने के कारण टस्कर हाथी को सभी हत्यारा हाथी कहकर ही बुलाते थे। राजाजी टाइगर रिजर्व और वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन अभिमन्यु चलाकर टस्कर को पकड़ा था, जिसके बाद हाथी को ‘अभिमन्यु’ नाम से बुलाया जाने लगा, लेकिन  ट्रेनिंग के लिए  क्रॉल में प्रवेश कराने के बाद सभी की रजामंदी के बाद टस्कर का नाम ‘राजा’ रख दिया गया।

हाथी को बुधवार को चीला रेंज में ले आए हैं। अब यह पूरी तरह से पालतू हो गया है और गश्त के कार्यों में उपयोग के लिए पूरी तरह से तैयार है। 
- अनिल पैन्यूली, रेंजर चीला 

लगभग पांच महीने तक महावतों द्वारा हाथी को प्रशिक्षित किया गया। ऐसा पहली बार हुआ है।
- प्रमोद ध्यानी, रेंजर 

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