फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   white rumped and red whiski in dehradun

100 साल बाद दून पहुंची बुलबुल और मुनिया

Sun, 23 Mar 2014 01:47 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 23 Mar 2014 01:47 AM IST
विज्ञापन
white rumped and red whiski in dehradun

दून घाटी के चिड़ियों के संसार में दो और चिड़ियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। अमूमन दक्षिण भारत में पाई जाने वाली मुनिया प्रजाति की व्हाइट रम्प्ड और बुलबुल प्रजाति की रेड व्हिस्की की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं।

विज्ञापन


पक्षी विज्ञानियों का मानना है कि ऐसा करीब एक शताब्दी के बाद हुआ है। इन चिड़ियों ने अपने निवास स्थल का विस्तार करते हुए पहाड़ की सुरम्य वादियों में दस्तक दी है।
विज्ञापन


इससे घाटी की जैव विविधता में भी विस्तार होगा और चिड़ियों की दुनिया में भी विस्तार होगा।

तराई वाले हिस्से में दिखी थी मुनिया

white rumped and red whiski in dehradun

उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2011 से चिड़ियों के संसार पर शोध कर रहे ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. कमलकांत जोशी ने व्हाइट रम्प्ड (मुनिया) को दून घाटी के मालदेवता क्षेत्र के तराई वाले हिस्से में पिछले साल मई माह में देखा था।

समुद्र तल से करीब 600-700 मीटर की ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में करीब 40-45 के झुंड में मुनिया चिड़िया दिखाई दी थीं। नारायण बगड़, थराली और कर्णप्रयाग में नवंबर माह में मुनिया चहकती पाई गई थीं।

1900 में है रिकॉर्ड में दर्ज
डा. जोशी ने बताया कि व्हाइट रम्प्ड को वर्ष 1900 में प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी वाल्टन ने कुमाऊं क्षेत्र में देखा था। इसके बाद इसकी उपस्थिति उत्तराखंड के किसी शोध प्रबंध में दर्ज नहीं है।

रेड व्हिस्की की भी प्रामाणिक उपस्थिति हुई दर्ज

white rumped and red whiski in dehradun

डा. जोशी ने बुलबुल प्रजाति की रेड व्हिस्की को पिछले साल जनवरी और मार्च माह में दून घाटी में देखने का दावा किया है।

करीब 10 के झुंड में बुलबुल की अन्य प्रजातियों रेड वेन्टेड और हिमालयन बुलबुल के साथ इस चिड़िया को देखा गया।

यह आमतौर से दून घाटी से दूरदराज के मैदानी इलाकों में पाई जाती है। दोनों प्रजातियों को यदाकदा उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में देखे जाने की बात बर्ड वाचर उठा चुके हैं, लेकिन इनकी प्रमाणिक उपस्थिति अब दर्ज की गई है।

विज्ञापन

पक्षी विज्ञानियों का है कहना

white rumped and red whiski in dehradun

दोनों प्रजातियों की चिड़ियों की दून घाटी क्षेत्र में उपस्थिति इनके प्रवास क्षेत्र में विस्तार का संकेत करती है। उत्तराखंड के इन क्षेत्रों में मुनिया और बुलबुल की प्रजातियों ने प्रवास शुरू किया है। यह पक्षियों की जैव विविधता की दिशा में दून घाटी की समृद्धता बढ़ने की ओर इशारा करता है।
-डा. कमलकांत जोशी, ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर

यह सही है कि व्हाइट रम्प्ड मुनिया और रेड व्हिस्की रेड बुलबुल पहली बार दून घाटी में देखी गई हैं। इससे पहले इनका दून के किसी शोध प्रबंधन में जिक्र नहीं मिलता। इस लिहाज से यह बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी, क्योंकि इससे दून घाटी की जैव विविधता में समृद्धि आएगी।
-डा. दिनेश भट्ट, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की पक्षी विविधता एवं पक्षी संवाद प्रयोगशाला के प्रमुख और पक्षी वैज्ञानिक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed