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Dehradun News: पानी कभी बासी नहीं होता, यूं ही न करें बर्बाद
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पानी कभी बासी नहीं होता। जब तक इसमें दुर्गंध न आए, इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। रात के पानी को सुबह बासी कहकर फेंक देना पानी की बर्बादी है। यह बात अमर उजाला की ओर से विश्व जल दिवस पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही।
बुधवार को जल है, तभी कल है विषय पर नगर निगम सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि मेयर सुनील उनियाल गामा ने की। विशेषज्ञों ने कहा कि जिस प्रकार से पानी का दोहन हो रहा है और लगातार भू-जल स्तर घट रहा है, उससे माना जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर ही होगा। अगर हम छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो बड़े स्तर पर पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है।
कार्यक्रम में जल संस्थान, जल निगम, नमामि गंगे के साथ ही अन्य विशेषज्ञों ने पानी को बचाने को लेकर सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान में नदी-नालों के साथ ही पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख रहे हैं। इससे लगातार पेयजल की किल्लत होती जा रही है। इस दौरान मांग उठी कि एमडीडीए सख्त नियम बनाए कि बिना वाटर हार्वेस्टिंग के किसी भी बिल्डिंग-मकान का नक्शा पास न हो। कार्यक्रम का संचालन साधना शर्मा ने किया।
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कार्यक्रम में अमर उजाला के वरिष्ठ स्थानीय संपादक दयाशंकर शुक्ला ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित कर दैनिक जीवन में जल संरक्षण को महत्व देने के लिए प्रेरित किया। वहीं जीएम डीडी जोशी ने कहा कि पानी अनमोल है, हम अपने प्रयासों से पानी को बचाने की दिशा में बड़ी पहल कर सकते हैं।
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युवा पीढ़ी समझ गई तो हो जाएगा समाधान : गामा
मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि सेफ वाटर विषय पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। पानी का सीधा संबंध पर्यावरण से है। अगर पर्यावरण ठीक रहेगा तो समय से बारिश होगी और हमारे गाद-गदेरे, प्राकृतिक स्रोत रीचार्ज होंगे। इससे भू-जल स्तर भी बढ़ेगा। इसलिए हमें पर्यावरण की चिंता करनी होगी। पर्यावरण और पानी को लेकर अगर युवा पीढ़ी जागरूक हो गई तो अपने आप ही समस्या का समाधान हो जाएगा। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक पौधे रोपने की अपील की।
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दून को पानी साफ, आरओ की आवश्यकता नहीं : शर्मा
स्पैक्स संस्थान के संस्थापक बृजमोहन शर्मा ने कहा कि कुछ इलाकों को छोड़कर दून का पानी बिल्कुल साफ है। चूने की मात्रा अधिक है, अगर इसे 12 घंटे तक किसी बर्तन में रखा जाए तो इसकी हार्डनेस कम हो जाती है, लेकिन लोग आरओ, फिल्टर लगाकर पानी के पोषक तत्वों को खत्म कर रहें हैं। साथ ही आरओ से रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किचन के पानी का इस्तेमाल लोग खेती, गमलों आदि में कर सकते हैं। इससे पानी की काफी बचत होगी।
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ऋषि-मुनि तो वर्षों से कर रहे पानी का संरक्षण : शशिकांत
आचार्य शशिकांत दुबे ने पानी को अध्यात्म से जोड़ते हुए कहा कि आज जो पानी को बचाने के लिए बातें हो रही हैं, उसे हमारे ऋषि-मुनि हजारों वर्षों से कर रहे हैं। इसलिए हर पूजा में पानी को कलश में लेकर उसकी पूजा की जाती है। कहा कि बिना पानी के जीवन नहीं है। हमारे शरीर में भी 70 प्रतिशत जल होता है। अगर जल नहीं रहेगा तो शरीर भी नहीं रहेगा। इसलिए पानी को बचाना आवश्यक है। यह सबकी जिम्मेदारी है कि कहीं पानी बर्बाद हो रहा है तो तत्काल उसे संरक्षित करने का प्रयास करें।
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अनमोल धरोहर का न करें आवश्यकता से अधिक दोहन : सतेंद्र
जल संस्थान मुख्यालय में प्रशासनिक अधिकारी सतेंद्र गुप्ता ने कहा कि जल अनमोल है, लेकिन इस अनमोल धरोहर को हम यूं ही बर्बाद कर रहे हैं। अगर समय से हम नहीं चेते तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आज घर हो या बाहर पानी का आवश्यकता से अधिक दोहन हो रहा है। इसलिए हमें अपनी नियमित आदतों में बदलाव करना होगा। अगर एक बाल्टी की आवश्यकता है तो उतना ही पानी लें। इससे काफी हद तक पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है।
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रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो जरूरी : पीयूष
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अभियंता पीयूष सिंह ने कहा कि नमामि गंगे योजना में पानी को शुद्ध करने के अनेक उपाय किए जा रहे हैं। गढ़वाल क्षेत्र की नदियों में गिरने वाले 131 गंदे नालों को टेप किया जा चुका है। 140 एमएलडी पानी को रिट्रीट कर नदियों में छोड़ा जा रहा है। अब कुमाऊं की नदियों को भी प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कागज की एक ए-फोर सीट बनाने में ही 30 लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में हम जब तक वर्षा जल का संरक्षण नहीं करते, पानी की कमी होती जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अगर हम भूजल के स्तर को एक मीटर भी ऊपर कर देते हैं तो कभी पानी की कमी नहीं होगी।
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मिलकर करना होगा पानी का संरक्षण : अश्वनी
उत्तरांचल आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर अश्वनी कांबोज ने कहा कि पानी नहीं होगा तो कुछ भी नहीं होगा। इसलिए हमें पानी बचाने के लिए जो भी संभव हो करना होगा। ताकि, हमारी आने वाली पीढ़ी को जल संकट से न गुजरना पड़े। इसके लिए सभी न्यूनतम पानी का इस्तेमाल करें। कहीं भी पानी बर्बाद होता है तो तत्काल इसे रोकने का प्रयास करें। घर, दफ्तर, ऑफिस में जितनी आवश्यकता है, उतना ही पानी इस्तेमाल करें।
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बुधवार को जल है, तभी कल है विषय पर नगर निगम सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि मेयर सुनील उनियाल गामा ने की। विशेषज्ञों ने कहा कि जिस प्रकार से पानी का दोहन हो रहा है और लगातार भू-जल स्तर घट रहा है, उससे माना जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर ही होगा। अगर हम छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो बड़े स्तर पर पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है।
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कार्यक्रम में जल संस्थान, जल निगम, नमामि गंगे के साथ ही अन्य विशेषज्ञों ने पानी को बचाने को लेकर सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान में नदी-नालों के साथ ही पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख रहे हैं। इससे लगातार पेयजल की किल्लत होती जा रही है। इस दौरान मांग उठी कि एमडीडीए सख्त नियम बनाए कि बिना वाटर हार्वेस्टिंग के किसी भी बिल्डिंग-मकान का नक्शा पास न हो। कार्यक्रम का संचालन साधना शर्मा ने किया।
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कार्यक्रम में अमर उजाला के वरिष्ठ स्थानीय संपादक दयाशंकर शुक्ला ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित कर दैनिक जीवन में जल संरक्षण को महत्व देने के लिए प्रेरित किया। वहीं जीएम डीडी जोशी ने कहा कि पानी अनमोल है, हम अपने प्रयासों से पानी को बचाने की दिशा में बड़ी पहल कर सकते हैं।
युवा पीढ़ी समझ गई तो हो जाएगा समाधान : गामा
मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि सेफ वाटर विषय पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। पानी का सीधा संबंध पर्यावरण से है। अगर पर्यावरण ठीक रहेगा तो समय से बारिश होगी और हमारे गाद-गदेरे, प्राकृतिक स्रोत रीचार्ज होंगे। इससे भू-जल स्तर भी बढ़ेगा। इसलिए हमें पर्यावरण की चिंता करनी होगी। पर्यावरण और पानी को लेकर अगर युवा पीढ़ी जागरूक हो गई तो अपने आप ही समस्या का समाधान हो जाएगा। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक पौधे रोपने की अपील की।
दून को पानी साफ, आरओ की आवश्यकता नहीं : शर्मा
स्पैक्स संस्थान के संस्थापक बृजमोहन शर्मा ने कहा कि कुछ इलाकों को छोड़कर दून का पानी बिल्कुल साफ है। चूने की मात्रा अधिक है, अगर इसे 12 घंटे तक किसी बर्तन में रखा जाए तो इसकी हार्डनेस कम हो जाती है, लेकिन लोग आरओ, फिल्टर लगाकर पानी के पोषक तत्वों को खत्म कर रहें हैं। साथ ही आरओ से रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किचन के पानी का इस्तेमाल लोग खेती, गमलों आदि में कर सकते हैं। इससे पानी की काफी बचत होगी।
ऋषि-मुनि तो वर्षों से कर रहे पानी का संरक्षण : शशिकांत
आचार्य शशिकांत दुबे ने पानी को अध्यात्म से जोड़ते हुए कहा कि आज जो पानी को बचाने के लिए बातें हो रही हैं, उसे हमारे ऋषि-मुनि हजारों वर्षों से कर रहे हैं। इसलिए हर पूजा में पानी को कलश में लेकर उसकी पूजा की जाती है। कहा कि बिना पानी के जीवन नहीं है। हमारे शरीर में भी 70 प्रतिशत जल होता है। अगर जल नहीं रहेगा तो शरीर भी नहीं रहेगा। इसलिए पानी को बचाना आवश्यक है। यह सबकी जिम्मेदारी है कि कहीं पानी बर्बाद हो रहा है तो तत्काल उसे संरक्षित करने का प्रयास करें।
अनमोल धरोहर का न करें आवश्यकता से अधिक दोहन : सतेंद्र
जल संस्थान मुख्यालय में प्रशासनिक अधिकारी सतेंद्र गुप्ता ने कहा कि जल अनमोल है, लेकिन इस अनमोल धरोहर को हम यूं ही बर्बाद कर रहे हैं। अगर समय से हम नहीं चेते तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आज घर हो या बाहर पानी का आवश्यकता से अधिक दोहन हो रहा है। इसलिए हमें अपनी नियमित आदतों में बदलाव करना होगा। अगर एक बाल्टी की आवश्यकता है तो उतना ही पानी लें। इससे काफी हद तक पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो जरूरी : पीयूष
नमामि गंगे प्रोजेक्ट के अभियंता पीयूष सिंह ने कहा कि नमामि गंगे योजना में पानी को शुद्ध करने के अनेक उपाय किए जा रहे हैं। गढ़वाल क्षेत्र की नदियों में गिरने वाले 131 गंदे नालों को टेप किया जा चुका है। 140 एमएलडी पानी को रिट्रीट कर नदियों में छोड़ा जा रहा है। अब कुमाऊं की नदियों को भी प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कागज की एक ए-फोर सीट बनाने में ही 30 लीटर पानी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में हम जब तक वर्षा जल का संरक्षण नहीं करते, पानी की कमी होती जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अगर हम भूजल के स्तर को एक मीटर भी ऊपर कर देते हैं तो कभी पानी की कमी नहीं होगी।
मिलकर करना होगा पानी का संरक्षण : अश्वनी
उत्तरांचल आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर अश्वनी कांबोज ने कहा कि पानी नहीं होगा तो कुछ भी नहीं होगा। इसलिए हमें पानी बचाने के लिए जो भी संभव हो करना होगा। ताकि, हमारी आने वाली पीढ़ी को जल संकट से न गुजरना पड़े। इसके लिए सभी न्यूनतम पानी का इस्तेमाल करें। कहीं भी पानी बर्बाद होता है तो तत्काल इसे रोकने का प्रयास करें। घर, दफ्तर, ऑफिस में जितनी आवश्यकता है, उतना ही पानी इस्तेमाल करें।