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उत्तराखंडः पानी की 'पहरेदारी' के लिए बनी नई 'ब्रिगेड'

Tue, 29 Sep 2015 01:23 PM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 29 Sep 2015 01:23 PM IST
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water gaurd organisation in uttarakhand.

पानी की पहरेदारी के लिए उत्तराखंड विद्युत उत्पादन जल कर आयोग व जल प्रबंधन व नियामक प्राधिकरण अस्तित्व में आ गया है। सरकार ने दोनों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। वर्ष 2013 में विधानसभा में दोनों के लिए एक्ट पारित करा लिए गए थे, लेकिन अधिसूचना अब जारी की गई। दोनों संस्थाओं का मुख्यालय देहरादून में होगा।

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आयोग को होंगी सिविल कोर्ट की शक्तियां प्राप्त
आयोग विद्युत उत्पादन में प्रयोग किए जाने वाले जल पर कर का निर्धारण करेगा। सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी। नए हाइड्रो प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए आयोग से अनुमति लेनी होगी और जो पहले से वजूद में हैं, उन्हें कानून लागू होने की तिथि से छह माह के भीतर आयोग में पंजीकरण कराना होगा।
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आयोग जहां उचित समझे पानी के प्रवाह में उपकरण संस्थापित कर पानी का मापन कर वाटर टैक्स वसूलेगा। अध्यक्ष व सदस्यों का चयन मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली सर्च कमेटी करेगी जिसमें सिंचाई, वित्त, ऊर्जा, विधि विभाग के सचिव या प्रमुख सचिव सदस्य होंगे।
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जल पर कितना कर लगेगा इसके लिए रेगुलेशन बनाने का काम शुरू हो गया है। लेकिन मोटे तौर पर 350 करोड़ रुपये के सालाना राजस्व का आंकलन किया गया है।

राज्य का मुख्य सचिव या केंद्र में सचिव बनेगा अध्यक्ष

water gaurd organisation in uttarakhand.

प्राधिकरण स्वायत्तशासी निकाय होगा। 25 साल का प्रशासनिक अनुभव रखने वाला व्यक्ति जो किसी राज्य का मुख्य सचिव या केंद्र में सचिव रहा हो, अध्यक्ष बनेगा।

जल संसाधन के क्षेत्र में 25 वर्ष काम करने वाला, अर्थ व्यवस्था क्षेत्र का विशेषज्ञ, व्यर्थ पानी के प्रबंधन का विशेषज्ञ, भू-प्रबंधन व कृषि क्षेत्र का एक-एक व्यक्ति सदस्य होगा। चयन समिति मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी। केंद्रीय जल आयोग का अध्यक्ष या कोई प्रतिनिधि, प्रमुख सचिव वित्त, भारतीय प्रबंध संस्थान के निदेशक व प्रमुख सचिव सिंचाई सदस्य होंगे।

यह प्राधिकरण जल नीति तैयार करेगा और समीक्षा के बाद टैरिफ प्लान लागू करेगा। प्राधिकरण को किसी वाद में सिविल न्यायालय की शक्तियां उपलब्ध होंगी। यह प्राधिकरण प्रदेश में जल की उपलब्धता, जल गुणवत्ता, झील, नदी, पानी के संसाधनों, पानी का उपयोग आदि पर काम करेगा।

दोनों संस्थाओं के गठन की अधिसूचना पिछले दिनों ही जारी की गई है। जल्द ही अध्यक्ष व सदस्यों का चयन होने के बाद सक्रिय रूप से कामकाज शुरू हो जाएगा। प्रदेश में पानी को लेकर स्वायत्तशासी संस्थाओं की जरूरत है।
- आनंद बर्द्धन, सचिव सिंचाई विभाग

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