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आपदा से निपटने के तरीके सिखलाएगी यह डोली
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 23 Apr 2014 01:27 PM IST
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स्वामी रामतीर्थ की तपस्थली विश्वनाथ पर्वत (घनसाली विधानसभा क्षेत्र) में रहने वाली डोली इस बार धार्मिक भावनाओं के साथ आपदा के बढ़ते खतरे के प्रति भी लोगों को सचेत करेगी।
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पहाड़ के पास है आपदाओं के मुकाबले का पूरा ज्ञान
डोली लोगों को यह भी याद दिलाएगी कि आपदाओं से पहाड़ सदियों से जूझता आया है और उसके पास वह पूरा ज्ञान मौजूद है जिससे आपदाओं का मुकाबला किया जाता है।
17 मई से शुरू हो रही विश्वनाथ-जगदीशिला डोली रथ यात्रा के लिए इस बार यह विशेष थीम रखी गई है। यात्रा के संयोजक मंत्री प्रसाद नैथानी के मुताबिक आपदाओं का मुकाबला पहले भी लोग खुद ही कर लिया करते थे।
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पर अब धीरे -धीरे यह परंपरागत ज्ञान समाप्त हो रहा है। लोगों को इसी ज्ञान की याद दिलाने की जरूरत है। करीब 23 दिन की यात्रा में डोली प्रदेश के सभी जिलों के महत्वपूर्ण स्थानों पर पहुंचेगी।
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दून में सोमवार को हुई बैठक में कैबिनेट मंत्री नैथानी केअलावा विश्वनाथ-जगदीशिला डोली रथ यात्रा पर्यटन विकास समिति के पदाधिकारी भी शामिल हुए। डोली की रथ यात्रा के कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया।
गंगा दशहरा के दिन होगा यात्रा का समापन
तय किया गया कि डोली प्रत्येक जिले के महत्वपूर्ण स्थल से होकर गुजरेगी। 17 मई से शुरू होने वाली इस यात्रा का समापन आठ जून को गंगा दशहरा के दिन घनसाली विधान सभा क्षेत्र में स्थित विशोन पर्वत पर होगा।
कैबिनेट मंत्री नैथानी के मुताबिक जगदीशिला डोली यात्रा में एक खास थीम आपदा केप्रति लोगों को जागरूक करना भी होगा।
जून 2013 में आई आपदा से साफ हो गया कि प्रकृति अब ज्यादा छेड़छाड़ स्वीकार करने को तैयार नही है। ऐसे में नदी, जंगल और पर्यावरण का जिम्मा अब समाज के हर वर्ग के लोगों को आगे बढ़कर लेना होगा।
पहले लोगों के पास विरासत से मिला ज्ञान भी था। लोग उंचाई वाले इलाकों में बसते थे। देवताओं के नाम पर जंगलों को संरक्षित किया करते थे। मौसम के साथ-साथ आस-पास के बदलाव का भी ध्यान रखा करते थे।
पर अब यह धीरे-धीरे गायब हो रहा है। डोली यात्रा के दौरान लोगों को ध्यान इन बातों पर भी खींचा जाएगा। समिति के अध्यक्ष रूप सिंह बजियाला के मुताबिक यात्रा से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
ये है कार्यक्रम
17 मई- हरिद्वार में गंगा स्नान, दून नगर निगम में मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में समारोह
18 मई-नरेंद्रनगर, आगराखाल, खाड़ी होते हुए गजा
19 मई- चंबा, मसूरी, नैनबाग, डामटा
20 मई- बडकोट, ब्रहमखाल, डुंडा, उत्तरकाशी
21 मई- जाखणीधार, अंजनीसैण
22 मई- बागवान, मलेथा, श्रीनगर
23 मई- जोशीमठ, कर्णप्रयाग
24 मई- ग्वालदम, गरुड़, बागेश्वर
25 मई- कांडा, चकोरी, बेरीनाग, गंगोलीहाट
26 मई- थल, मुन्स्यारी, बसंत कोट, कनालीछिना, पिथौरागढ़
27 मई- चंपावत, लोहाघाट
28 मई- गोलू देवता मंदिर, अल्मोड़ा नंदा देवी मंदिर
29 मई- रानीखेत, भवाली, नैनीताल
30 मई- हल्द्वानी, कालाढ़ुंगी, रामनगर, काशीपुर, जसपुर
31 मई- पाटीसैंण, पौड़ी, सतपुली
एक जून- तिलवाड़ा से होते हुए कालीमठ
दो जून- गुप्तकाशी, मुन्ना देवल, बजीरा गांव
तीन जून- घनसाली, सिल्यारा, बूढ़ाकेदार
चार जून- बिनकखाल, नागेश्वर सौड़
पांच जून- घनसाली, फलेंडा, मैगाधार
छह जून- बजियाल गांव से होते हुए अंथवाल गांव
सात जून- सरपोली होते हुए जगदिशिला दर्शन
आठ जून- विशोन पर्वत