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Dehradun News: राम मंदिर आंदोलन के दौरान 18 दिन काटे थे जेल
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Iविष्णु महावर ने आंदोलन में निभाई थी मुख्य और सक्रिय भूमिकाI
श्री हनुमत धाम सेवा समिति के अध्यक्ष और विकासनगर निवासी विष्णु महावर ने राम मंदिर आंदोलन में मुख्य और सक्रिय भूमिका निभाई थी। वह 18 दिन जेल में भी रहे। विष्णु महावर बताते हैं कि यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता का बयान दिया था। इससे कार सेवक भड़क गए थे। विरोध में 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में संघ की ओर से जनसभा करने का निर्णय लिया गया। बड़ी संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचने का आह्वान किया गया।
महावर ने बताया कि विकासनगर से भी कार सेवकों को वहां जाना था, लेकिन पुलिस ने 28 फुटा रोड स्थित बिजली घर के पास ही कार सेवकों को रोक लिया। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस घर में घुस गई, लेकिन वे पीछे के रास्ते भाग खड़े हुए। जहां से वे किसी तरह हिमाचल प्रदेश के भगानी पहुंचे। फिर संघ की ओर से आदेश हुआ कि सभी पांवटा साहिब स्थित सनातन धर्म मंदिर में एकत्र होंगे। तब हिमाचल में भाजपा की सरकार थी। फिर रेल से अयोध्या जाने का निर्णय लिया गया। किसी तरह सहारनपुर पहुंचे। उन्होंने बताया कि सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर फिर से कार सेवकों को रोक लिया गया। कई कार सेवकों को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सहारनपुर जेल ले जाया गया। जहां वे करीब 18 दिन रहे। उन्होंने बताया कि वे कार सेवा समिति के संयोजक भी रहे। कहा कि जल्द ही करोड़ों रामभक्तों और कार सेवकों का सपना पूरे होने जा रहा है। वे छह दिसंबर 1992 के दिन अयोध्या में आयोजित हुई जनसभा का भी हिस्सा बने।
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श्री हनुमत धाम सेवा समिति के अध्यक्ष और विकासनगर निवासी विष्णु महावर ने राम मंदिर आंदोलन में मुख्य और सक्रिय भूमिका निभाई थी। वह 18 दिन जेल में भी रहे। विष्णु महावर बताते हैं कि यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता का बयान दिया था। इससे कार सेवक भड़क गए थे। विरोध में 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में संघ की ओर से जनसभा करने का निर्णय लिया गया। बड़ी संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचने का आह्वान किया गया।
महावर ने बताया कि विकासनगर से भी कार सेवकों को वहां जाना था, लेकिन पुलिस ने 28 फुटा रोड स्थित बिजली घर के पास ही कार सेवकों को रोक लिया। उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस घर में घुस गई, लेकिन वे पीछे के रास्ते भाग खड़े हुए। जहां से वे किसी तरह हिमाचल प्रदेश के भगानी पहुंचे। फिर संघ की ओर से आदेश हुआ कि सभी पांवटा साहिब स्थित सनातन धर्म मंदिर में एकत्र होंगे। तब हिमाचल में भाजपा की सरकार थी। फिर रेल से अयोध्या जाने का निर्णय लिया गया। किसी तरह सहारनपुर पहुंचे। उन्होंने बताया कि सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर फिर से कार सेवकों को रोक लिया गया। कई कार सेवकों को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सहारनपुर जेल ले जाया गया। जहां वे करीब 18 दिन रहे। उन्होंने बताया कि वे कार सेवा समिति के संयोजक भी रहे। कहा कि जल्द ही करोड़ों रामभक्तों और कार सेवकों का सपना पूरे होने जा रहा है। वे छह दिसंबर 1992 के दिन अयोध्या में आयोजित हुई जनसभा का भी हिस्सा बने।
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