श्रीनगर: पुल पर पाइपलाइन डालने पर बढ़ा विवाद, ग्रामीणों का हंगामा, पुलिस ने संभाली स्थिति
लंबे समय से वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना के तहत पुल पर पाइपलाइन डालने का विरोध कर रहे ग्रामीणों का शुक्रवार को गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल से पाइप लाइन गुजरने पर सिर्फ 4 मीटर जगह रह जाएगी।
हर समय पाइप में 45 टन पानी रहेगा। जबकि पुल की क्षमता 65 टन है। ऐसे में बड़े वाहन इससे गुजर नहीं पाएंगे। ऐसे में जब शुक्रवार को काम शुरू हुआ तो ग्रामीण काम रुकवाने के लिए अड़ गए। वहीं ग्रामीणों को रोकने के लिए गांव में पुलिस बल तैनात रहा। हंगामा अधिक बढ़ने पर पुलिस ने स्थिति संभाली। वहीं, ग्रामीणों के समर्थन में पूर्व केबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट भी पहुंचे। ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की।
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि एक साल पूर्व प्रदेश सरकार श्रीनगर जल विद्युत परियोजना संचालन कर रही एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लि.) के आगे नहीं झुकती, तो आज चौरास क्षेत्र की जनता विरोध नहीं करती। वहीं, एएचपीसीएल पोषित वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना का निर्माण कार्य रुकता भी नहीं।
योजना में शुरू से ही रहा पेच
ग्रामीणों का कहना है कि यह ऐसी योजना बन गई है, जो शुरू से अटकती आ रही है। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण के बाद पानी के संकट को देखते वर्ष 2010 में वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना के निर्माण का निर्णय लिया गया था। योजना निर्माण हेतु पेयजल निगम, जल संस्थान और एएचपीसीएल के बीच 30 मार्च 2012 को अनुबंध हुआ था।
इसकी अनुमानित लागत 12 करोड़ 70 लाख 98 हजार तय हुई। कंपनी ने 28 फरवरी 2013 तक पूर्ण धनराशि देनी थी। लेकिन कंपनी ने साढ़े छह सालों तक सिर्फ 10 करोड़ 5 लाख रुपये दिए। इसके तहत सुपाणा मोटर पुल से होते हुए श्रीनगर की ओर पाइप लाइन डालने का प्लान बनाया गया।
लेकिन इसको तकनीकि विशेषज्ञों ने फेल कर दिया। लगभग ढाई साल पहले जल निगम ने डीएसबी से साइफन के माध्यम से पानी निकालने और पाइप के लिए अलकनंदा नदी के ऊपर पुल निर्माण का प्रस्ताव बनाते हुए कंपनी को 19.90 करोड़ रुपये का आंकलन दिया। इस पर भी लंबे समय तक खींचतान चलती रही।
त्रिवेंद्र सरकार ने बदला था फैसला
तब जाकर 8 फरवरी 2019 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में शासन के अधिकारियों, जल निगम व एएचपीसीएल के अधिकारियों की बैठक में इस प्रस्ताव से हाथ पीछे खींच लिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि जल निगम के आगणन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
कंपनी पूर्व निर्धारित प्लान के अनुसार धनराशि देगी। सुपाणा पुल से ही पाइप लाइन गुजरेगी। साथ ही साइफन के बजाय डीएसबी से ही पानी की निकासी की जाएगी। जिसके बाद एएचपीसीएल ने मार्च माह में जल निगम को अवशेष 2 करोड़ 70 लाख 98 हजार रुपये का भुगतान कर दिया।
पुल में पाइप गुजरने से बड़े वाहनों की आवाजाही बाधित नहीं होगी। सिर्फ भारी मालवाहक वाहन नहीं जा पाएंगे।
आरएस बिष्ट, अधिशासी अभियंता जल निगम देवप्रयाग