{"_id":"597583794f1c1b14668b4891","slug":"village-is-best-exam-of-hindu-muslim-unity","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल नरुवाघोल गांव हुआ वीरान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल नरुवाघोल गांव हुआ वीरान
कुंदन मेहता / अमर उजाला, गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)
Updated Mon, 24 Jul 2017 10:50 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल ब्रिटिशकालीन प्रमुख पड़ाव नरुवाघोल अब वीरान हो गया है। कभी 18 परिवारों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले नरुवाघोल में अब दो ही परिवार रहते हैं। असुविधा की मार से लोग एक-एक कर गांव से पलायन कर गए।
विज्ञापन
अतीत में नरु वाघोल हिंदू और मुस्लिम परिवारों के मेलजोल के लिए जाना जाता था। अस्कोट-कर्णप्रयाग पैदल मार्ग का प्रमुख पड़ाव नरु वाघोल एक समय में काफी खुशहाल था। मुख्य सड़क से मात्र एक किमी की दूरी पर बसे नरुवाघोल गांव में सरकार मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाई। सरकार से सुविधाओं की उम्मीद टूटी तो 90 के दशक से गांव के लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया।
विज्ञापन
गांव के कुशल सिंह, कुंवर सिंह और गंगा सिंह का परिवार ग्वाड़ी में बस गया। इसी तरह अबरार अहमद, भूपाल सिंह, पृथ्वीराज सिंह, जीवन सिंह आदि के परिवार दिल्ली और अल्मोड़ा बस में गए।
विज्ञापन
गांव में अब एक हिंदू जसवंत सिंह पथनी, और एक मुस्लिम अब्दुल शाहिद का परिवार रह गया है। सलिया पोस्टऑफिस का लेटरबॉक्स नरुवाघोल में भी लगा था। लेकिन इसमें पत्र डालने वाला कोई नहीं रह गया है। नरुवाघोल अब नायल के लिए बन रही सड़क से जुड़ गया है। नरुवाघोल की रंगत फिर से लौटाने के लिए लोग इस सड़क का सेराघाट से मिलान चाहते हैं।
दो परिवारों में नौ लोग
नरुवाघोल में रह रहे जसवंत सिंह पथनी के परिवार में पत्नी, दो बेटे और और दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा आशीष (36) मिनी सहकारी बैंक काम करता है। छोटे बेटे कमलेश (19) ने पॉलीटेक्निक किया है। बड़ी लड़की सुगंधा (24) का विवाह चुका है। छोटी लड़की सोनिया (21) ने बी.कॉम की पढ़ाई पूरी की है। इसी तरह अब्दुल शाहिद के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी रेशमा (12) कक्षा 6 में जबकि रुखसाना (7) कक्षा दो में पढ़ती है।
फोटो 23 पीटीएच 01, 04 पी
सरकार सुविधा दे तो खुशहाल हो सकता है नरुवाघोल
नरुवाघोल में रह रहे पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य जसवंत सिंह पथनी और अब्दुल शाहिद बताते हैं कि वह लोग 40 साल से यहां रह रहे हैं। कहते हैं कि गांव से 16 परिवार चले गए। सरकार सुविधा दे तो नरुवाघोल फिर खुशहाल हो सकता है। गांव की रंगत लौट सकती है।
नरुवाघोल को फिर से पड़ाव के रूप में विकसित किया जाएगा। नायल सड़क को चौनापातल होते हुए सेराघाट से लिंक किया जाएगा।
- मीना गंगोला, विधायक गंगोलीहाट