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आज सुबह अस्त होगा शुक्र, मांगलिक कार्यों के लिए करना होगा इंतजार
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विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कारक माने जाने वाला शुक्र ग्रह माघ शुक्ल तृतीया यानि आज अस्त होगा। 14 फरवरी सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर शुक्र पूर्व दिशा में अस्त होगा और शुक्र तारा लग जाएगा। करीब 64 दिन तक अस्त रहने के बाद 20 अप्रैल को शुक्र उदित होगा।
वहीं, 16 फरवरी सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर गुरु पूर्व दिशा में उदय होगा। गुरु के उदय से पहले ही शुक्र अस्त होने से मांगलिक कार्यों के लिए लगभग दो महीने से अधिक समय तक इंतजार करना होगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. सुशांत राज और पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया कि शुक्र ग्रह को प्रेम और विवाह का कारक माना गया है। मान्यता है कि शुक्र ग्रह के प्रभाव से ही व्यक्ति को भौतिक सुख, भोग-विलास, सौन्दर्य, कला-प्रतिभा और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। कहा कि शुक्र ग्रह के अस्त होने के बाद भूमि पूजन, शादी, मुंडन, ग्रह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते।
हालांकि, इस दौरान नामकरण, पूजन-हवन, कथा, सगाई, वाहन खरीदारी आदि शुभ कार्य किए जा सकते हैं। 16 फरवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शुभ कार्यों के लिए इसे अबूझ मुहूर्त माना गया है। हालांकि, इस साल सूर्योदय के साथ शुक्र ग्रह के अस्त होने के चलते विवाह का योग नहीं बन रहा है।
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विवाह के लिए पहला मुहूर्त 22 अप्रैल को
पंडित विनोद झा ने बताया कि शुक्र उदय होने के बाद पहला पूर्ण शुद्ध विवाह मुहूर्त 22 अप्रैल को शुरू होगा। इसके बाद मई, जून, जुलाई तक 38 मुहूर्त हैं। जबकि, चातुर्मास के बाद दिसंबर माह में मलमास शुरू होने तक करीब 13 मुहूर्त है। झा ने बताया कि किसी भी ग्रह के सूर्य के समीप आना उसे अस्त कर सकता है।
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वहीं, 16 फरवरी सुबह 7 बजकर 30 मिनट पर गुरु पूर्व दिशा में उदय होगा। गुरु के उदय से पहले ही शुक्र अस्त होने से मांगलिक कार्यों के लिए लगभग दो महीने से अधिक समय तक इंतजार करना होगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. सुशांत राज और पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया कि शुक्र ग्रह को प्रेम और विवाह का कारक माना गया है। मान्यता है कि शुक्र ग्रह के प्रभाव से ही व्यक्ति को भौतिक सुख, भोग-विलास, सौन्दर्य, कला-प्रतिभा और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। कहा कि शुक्र ग्रह के अस्त होने के बाद भूमि पूजन, शादी, मुंडन, ग्रह प्रवेश आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते।
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हालांकि, इस दौरान नामकरण, पूजन-हवन, कथा, सगाई, वाहन खरीदारी आदि शुभ कार्य किए जा सकते हैं। 16 फरवरी को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शुभ कार्यों के लिए इसे अबूझ मुहूर्त माना गया है। हालांकि, इस साल सूर्योदय के साथ शुक्र ग्रह के अस्त होने के चलते विवाह का योग नहीं बन रहा है।
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विवाह के लिए पहला मुहूर्त 22 अप्रैल को
पंडित विनोद झा ने बताया कि शुक्र उदय होने के बाद पहला पूर्ण शुद्ध विवाह मुहूर्त 22 अप्रैल को शुरू होगा। इसके बाद मई, जून, जुलाई तक 38 मुहूर्त हैं। जबकि, चातुर्मास के बाद दिसंबर माह में मलमास शुरू होने तक करीब 13 मुहूर्त है। झा ने बताया कि किसी भी ग्रह के सूर्य के समीप आना उसे अस्त कर सकता है।