फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   venkaiah naidu in fri dehradun

हरियाली बचाने वाले राज्यों को मिले ग्रीन बोनस : उपराष्ट्रपति

Wed, 25 Apr 2018 07:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 25 Apr 2018 07:54 PM IST
विज्ञापन
venkaiah naidu in fri dehradun
venkaiah naidu - फोटो : amar ujala

देश की हरियाली बचाने के लिए राज्यों को ग्रीन बोनस मिलना चाहिए। इसके अलावा हरियाली बचाने की कवायद करने वाले स्थानीय लोगों, पंचायतों और स्थानीय निकायों को भी इंसेंटिव मिलना चाहिए।

विज्ञापन


देश में तेजी से बढ़ रहे मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करने के रास्ते तलाशने होंगे। यह बात उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी(आईजीएनएफए) के दीक्षांत समारोह में कही। उन्होंने भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को संदेश दिया कि फॉरेस्ट का मतलब ‘फार फ्रॉम रेस्ट’ समझकर अपनी ड्यूटी निभाएं।
विज्ञापन


बुधवार को वन अनुसंधान संस्थान(एफआरआई) के सभागार में आईजीएनएफए के 2016-18 बैच का दीक्षांत समारोह हुआ, जिसमें 53 अधिकारी पासआउट हुए। इसमें दो मित्र राष्ट्र भूटान के अधिकारी भी शामिल हैं। मेधावियों को पुरस्कृत करने के बाद उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि एक ओर जहां दुनियाभर में घटता वन क्षेत्र चिंता का विषय है तो भारत में तेजी से फॉरेस्ट कवर बढ़ना अच्छा संकेत है। 2015-17 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 8,021 किलोमीटर फॉरेस्ट कवर बढ़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने यह भी कहा कि डिफेंस सिक्योरिटी की तरह हमें निश्चित तौर पर एनवायरमेंटल सिक्योरिटी, इकोलॉजी सिक्योरिटी की जरूरत है। दीक्षांत समारोह से पासआउट हुए युवा अधिकारियों से आह्वान किया कि वह फॉरेस्ट कवर बढ़ाने को अपनी जिम्मेदारी मानें। जंगलों की हिफाजत के लिए चले चिपको आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में हरियाली बचाने वाले राज्यों को ग्रीन बोनस मिलना चाहिए। स्थानीय स्तर पर भी लोगों, पंचायतों व निकायों को हरियाली बचाने पर इंसेंटिव मिलना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने जनजातियों की रक्षा और वनों के साथ उनके जुड़ाव का जिक्र करते हुए बढ़ते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष पर चिंता जताई। उन्होंने इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर आप जंगलों की हिफाजत करेंगे तो जंगल आपकी हिफाजत करेंगे। उन्होंने तेलंगाना निवासी डी रमैया का जिक्र भी किया, जिन्हें ग्रीन पद्मा अवार्ड दिया गया है। वन संपदा को बचाने में कई फॉरेस्ट अधिकारियों ने प्राणों का बलिदान तक दिया है।

ग्रीन अकाउंटिंग को अपनाना जरूरी : राज्यपाल
राज्यपाल डॉ.कृष्ण कांत पाल ने दीक्षांत समारोह में कहा कि एक प्रोफेशनल व प्रशिक्षित फॉरेस्टर बदलते पर्यावरण की समस्याओं को समझ सकता है। राज्यपाल ने कहा कि दून घाटी को ‘भारतीय वानिकी का पालना’ कहा। राज्यपाल ने कहा कि वन संरक्षण में अधिक शोध की भी आवश्यकता है। वन प्रबंधन की आयोजना में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए जाने की आवश्यकता है। बाढ़, सूखा, मृदा उर्वरता में कमी आदि प्राकृतिक आपदाओं के नियंत्रण में वनों की अहम भूमिका है। वन अधिकारियों को वैज्ञानिक ज्ञान के प्रयेाग के साथ स्थानीय लोगों को तकनीकी तौर पर दक्ष करने पर भी ध्यान देना चाहिए। कहा कि जिस प्रकार अर्थशास्त्री जीडीपी का मूल्यांकन करते हैं, उसी प्रकार ‘ग्रीन अकाउंटिंग’ की अवधारणा को भी अपनाना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण के साथ नई तकनीकी का हो प्रयोग : मुख्यमंत्री
उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि आज का दिन उनकी तपस्या, मेहनत और लगन के फ ल प्राप्ति का दिन है। वनों का महत्व हमारे लिए दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड का 71 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र है। उत्तराखंड चिपको आंदोलन की भूमि है। मुख्यमंत्री ने दीक्षांत में पासआउट अधिकारियों से नई तकनीकी और शोध को बढ़ावा देने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि वन सम्पदा हमारे जीवन का आधार है। वनों और मानव जीवन की मूल आवश्यकता में सामंजस्य बनाना एक बड़ी चुनौती है। वनों का अधिक से अधिक लाभ भी हो और उनपर कोई संकट न आए, ये देखना हम सबकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी ‘इको सेंसेटिव जोन’ का जिक्र करते हुए कहा की पर्यावरण को बचाते हुए, नई तकनीकों के प्रयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है।


जलवायु परिवर्तन रोकने को वन संरक्षण जरूरी : डॉ. हर्षवर्धन
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने युवा अधिकारियों को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी देहरादून में प्रशिक्षण पूर्ण होने पर बधाई दी। उन्होंने वनाश्रित समुदायों को सशक्त बनाने तथा वनों से दीर्घकालीन लाभ प्राप्त करने, ग्रामीणों की आजीविका के स्रोत एवं जलवायु परिवर्तन को रोकने के एक साधन के रूप में वनों को संरक्षित किए जाने के प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ये युवा अधिकारी राष्ट्र की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed