फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Valley of words program in dehradun

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने किया वैली ऑफ वर्ड्स शुभारंभ, कहा साहित्य का केंद्र बनेगा उत्तराखंड

Fri, 23 Nov 2018 11:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 23 Nov 2018 11:21 AM IST
विज्ञापन
Valley of words program in dehradun
baby rani maurya

‘वैली ऑफ वर्ड्स लिटरेचर’ फेस्टिवल के शुभारंभ पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि शिक्षण केंद्र के रूप में विख्यात देहरादून और उत्तराखंड, आने वाले समय में साहित्य व लेखन का केंद्र बनेगा। पिछले कुछ समय से दून में साहित्य, लेखन, कला एवं संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों के आयोजनों में बढ़ोत्तरी हुई है। देशभर में उत्तराखंड ने एक अलग पहचान बनाई है। 

विज्ञापन


शुक्रवार को राजपुर रोड स्थित होटल मधुबन में तीन दिवसीय ‘वैली ऑफ वर्ड्स लिटरेचर’ फेस्टिवल का शुभारंभ हुआ। अमर उजाला इस कार्यक्रम का हिंदी मीडिया पार्टनर है। इस अवसर पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि लेखकों, कलाकारों, शिल्पकारों, पत्रकारों व प्रबुद्धजनों के एक मंच पर आने से समाज व राष्ट्र को लाभ मिलेगा। सुमित्रा नंदन पंत, गौरा पंत शिवानी, शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों की यह धरती आज भी बौद्धिकता की केंद्र बिंदु है। कहा भी गया है कि साहित्य, संगीत और कलाविहीन व्यक्ति पशु के समान होता है। उन्होंने साहित्य और कला को आम आदमी तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और इंटरनेट ने सूचनाओं को सर्वसुलभ तो किया, लेकिन लोगों को किताबों से दूर कर दिया है। विशेषकर नई पीढ़ी में किताबें पढ़ने की प्रवृत्ति लगभग खत्म हो गई है। इस पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। बाल साहित्य को कैसे अधिक रुचिकर और ज्ञानवर्द्धक बनाया जाए, इस पर मंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अच्छी रचनाओं को भाषा की सीमा में नहीं बांधा जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुनिया की तमाम अच्छी रचनाओं का एक से दूसरी भाषा में बड़े पैमाने पर अनुवाद हुआ है, जिसे पाठकों ने हाथों-हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि रविंद्र नाथ टैगोर की गीतांजली को बांग्ला से अंग्रेजी में अनुवादित किया गया, जिसके चलते उन्हें साहित्य का नोबल मिला। उन्होंने कहा कि उस समय यदि प्रेमचंद के साहित्य का भी अंग्रेजी अनुवाद होता तो संभवत: वह वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त करते। फेस्टिवल के शुभारंभ पर वैली ऑफ वर्ड्स के विशेष डाक टिकट का भी विमोचन किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के पति प्रदीप कुमार, बिबेक देबरॉय, लक्ष्मी शंकर वाजपेई, संजीव चोपड़ा, रश्मि चोपड़ा, राजेंद्र डोभाल, मे.ज. इयान कार्डोजो, रॉबिन गुप्ता समेत कई अन्य साहित्यकार, लेखक, कवि, चिंतक, पत्रकार व साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। 
 

पहाड़ का विकास चाहिए तो पहाड़ी बनें

पहाड़ को यदि विकास के रास्ते पर ले जाना है तो हमें पहाड़ी बनकर रहना होगा। पहाड़ के आदमी की तरह सोचें और काम किए बिना, पहाड़ के विकास की योजनाएं बनाने का कोई फायदा नहीं होगा। आज अंतिम व्यक्ति को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाने की सख्त जरूरत है।
 
आरएस टोलिया फोरम के तहत पहाड़ के विकास और पलायन थामने के उपायों पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने यह राय रखी। पूर्व मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल ने कहा कि डा. आरएस टोलिया पहाड़ के विकास पर विशेष जोर देते थे। टिकाऊ विकास के लिए वह अंतिम व्यक्ति तक केंद्रित योजनाएं बनाने पर जोर देते थे। पूर्व मुख्य सचिव डा. इंदु कुमार पांडे ने कहा कि कल्याणकारी व विकासवादी अर्थशास्त्र को जमीन पर उतारने वाले स्व. टोलिया के सपनों को साकार करने के लिए सरकारों को इस दिशा में गंभीरता से काम करना होगा। पूर्व मुख्य सचिव एन रविशंकर ने कहा कि पहाड़ के विकास के लिए वहां की परिस्थितियों के अनुकूल छोटी-छोटी योजनाओं को तैयार करना होगा। 

यूकॉस्ट के महानिदेशक डा. राजेंद्र कुमार डोभाल ने कहा कि डा. टोलिया विभिन्न संस्थानों व लोगों को जोड़कर गरीबों के कल्याण पर बल देते थे। आज पहाड़ में नए ढंग से विकास कार्य करने की जरूरत है। कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति डा. बीके जोशी ने कहा कि हिमालयी राज्यों के बीच समन्वय से योजनाएं तैयार करने और क्रियान्वन में आसानी हुई है। उद्योग निदेशक सुधीर चंद्र नौटियाल ने कहा कि पहाड़ पर वहां के संसाधन आधारित छोटे उद्योग धंधे ज्यादा फायदेमंद साबित हुए हैं। पूर्व प्रमुख वन संरक्षक एसटीएस लेप्चा ने वन एवं पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए खेती व वन्य योजनाएं बनाने की आवश्यकता जताई। अनूप नौटियाल और बिनीता शाह ने कार्यक्रम का संचालन किया।
 

अंग्रेजी को विकसित कर रहे हिंदी की ‘रोटी’ खाने वाले

भारत में हिंदी आज भी दोयम दर्जे की भाषा मानी जाती है। खुद हिंदी से रोजगार पाने वाले लोग अंग्रेजी को आगे बढ़ा रहे हैं। जिन घरों में हिंदी के कारण चूल्हा जलता है, उनके बच्चे भी हिंदी छोड़कर अंग्रेजी की ओर बढ़ रहे हैं। यही हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। वैली ऑफ  वर्ड्स लिटरेचर फेस्टिवल में आयोजित ‘कारवां हिंदी का’ सत्र में वक्ताओं ने इस बात को लेकर चिंता जताई।

प्रख्यात साहित्यकार पुष्पा पुष्पिता अवस्थी ने हिंदी को भारतीय संस्कृति की भाषा बनाने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत से ज्यादा विदेशों में हिंदी मजबूत हो रही है। क्योंकि यह हमारी संवेदना, सम्मान, अस्मिता और एकता से जुड़ी हुई है। प्रख्यात साहित्यकार डा. गोविंद मिश्र ने कहा कि आज हिंदी के आयोजनों में भाषा से जुड़े साहित्यकारों, लेखकों व कवियों को उसी तरह महत्व दिया जाता है, जैसे श्राद्ध में पंडों को। उन्होंने कहा कि हिंदी कभी भी किसी सरकार की प्राथमिकता में नहीं रही। जब तक हिंदुस्तान में गरीबी है, हिंदी को कोई हटा नहीं सकता। आज भी तथाकथित बड़े अधिकारियों और समाज की नजर में हिंदी गरीब व पिछड़ों की भाषा बनी हुई है।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीय- जाति, धर्म, संप्रदाय, रंग, क्षेत्र के अंतर को भूलकर हिंदी में बात करते हैं। यही सम्मान हमें हिंदी के लिए भारत में भी पैदा करना होगा। डा. राकेश पांडे ने कहा कि आजादी के बाद हिंदी का कारवां तेजी से बढ़ा है। सिनेमा ने हिंदी को आगे बढ़ाने का काम तो किया, लेकिन बड़े स्तर पर रोजगार से नहीं जोड़ा गया, जैसी उम्मीद की जा रही थी। 

संगीता गुप्ता ने कहा कि वक्त के साथ हिंदी सर्व समाज की भाषा बन रही है। देश-दुनिया में हिंदी के महत्व को समझते हुए भाषा को यथोचित सम्मान दिया जा रहा है। इंद्रजीत सिंह ने कहा कि सिनेमा के जरिये दक्षिण-उत्तर पूर्व के उन क्षेत्रों तक हिंदी की पहुंच बढ़ी है, जहां इनको बोलने और समझने वाले बेहद कम लोग हैं। धीरे-धीरे सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed