फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarkashi Tunnel Rescue Danger in drilling on hill in upper area Scientist Not confident About that

Tunnel Rescue: सुरंग के ऊपरी क्षेत्र में पहाड़ी पर ड्रिलिंग में खतरा बरकरार, आश्वस्त नजर नहीं आ रहे विशेषज्ञ

Sun, 26 Nov 2023 06:00 AM IST
अलका त्यागी विनोद मुसान, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 26 Nov 2023 06:00 AM IST
सार

Uttarkashi Tunnel Rescue: सिलक्यारा में अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स के देखरेख में चल रहे ऑपरेशन में विशेषज्ञ वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

विज्ञापन
Uttarkashi Tunnel Rescue Danger in drilling on hill in upper area Scientist Not confident About that
वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए जाती मशीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने की जद्दोजहद में रोज नई अड़चनें सामने आ रही हैं। सुरंग में फैले मलबे के बीच स्टील, गार्डर और लोहे के सरिये आने से ऑगर मशीन आगे नहीं बढ़ पा रही। ऐसे में पहाड़ी के ऊपरी छोर से ड्रिलिंग की भी तैयारी है, लेकिन इसमें खतरा बरकरार है।

विज्ञापन


चट्टानों की कमजोर बनावट ड्रिलिंग के कंपन से कभी भी भर भराकर गिर सकती है, विशेषज्ञ भी इससे आशंकित हैं। सिलक्यारा में अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स के देखरेख में चल रहे ऑपरेशन में विशेषज्ञ वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। आपदा प्रबंधन विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ ने कहा, वर्टिकल ड्रिलिंग भी एक विकल्प है, लेकिन संभवतया अंतिम विकल्प हो।
विज्ञापन


सुरंग में सब्र और इंतजार के 14 दिन: जब-जब उम्मीदें जगीं, तब-तब टूट गईं ख्वाहिशें, बेबसी बयां कर रहीं तस्वीरें
विज्ञापन
विज्ञापन


कहा, इसमें खतरा बहुत ज्यादा है। जिस क्षेत्र में सुरंग का निर्माण किया गया है, वहां चट्टानें बहुत कमजोर हैं, जो भारी भरकम मशीन के कंपन से कभी भी भर भराकर गिर सकती हैं। सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स भी इस बात को लेकर आशंकित हैं। इधर, रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीमों ने वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए प्लेटफार्म तैयार कर लिया है, लेकिन इन्हीं आशंकाओं के चलते अभी अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका है।

बताया जा रहा कि वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर अंतिम फैसला सतलज जल विद्युत निगम और ऑयल एंड नैचुरल गैस कोऑपरेशन के अधिकारी ही लेंगे। ड्रिलिंग के लिए इंजीनियरों की टीम लगातार पहाड़ी पर पहुंचकर संभावनाओं की तलाश कर रही है।

90 मीटर गहराई में ड्रिलिंग में लग सकते 48 घंटे

यदि पहाड़ी के ऊपरी क्षेत्र में वर्टिकल ड्रिलिंग की जाती है, तो करीब 90 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग करने में 45 से 48 घंटे का समय लग सकता है। यह भी तब है, जब ड्रिलिंग के दौरान कोई बाधा नहीं आती।

25 से 30 मीटर का क्षेत्रफल संवेदनशील

सुरंग में जिस स्थान पर मलबा गिरा है, जियोलॉजिकल मैपिंग रिपोर्ट में इसके 20 मीटर हिस्से को पहले ही संवेदनशील श्रेणी में दर्शाया गया था। वरिष्ठ भूगर्भ विज्ञान डॉ. एके बियानी की माने तो सुरंग में भूस्खलन होने से अब इसके 25 से 30 मीटर हिस्से में भी इसका प्रभाव हो सकता है। मतलब यह हिस्सा खतरनाक साबित हो सकता है।

उनके अनुसार, अभी जिस स्थान को वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए चुना गया है, वहां से सुरंग तक पहुंचने में करीब 90 मीटर भीतर तक खुदाई करनी होगी। कहा, यदि मौके पर मौजूद विशेषज्ञ खुद इसको लेकर आशंकित हैं तो ड्रिलिंग वाले चिह्नित स्थान को बदल देना चाहिए। इससे गहराई बढ़ जाएगी, लेकिन ऑपरेशन की सफलता बढ़ जाएगी। बताया, इस क्षेत्र में बड़कोट नामक थ्रस्ट भी गुजरता है, जो मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) से दूर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed