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Dehradun News: उत्तराखंड की बेटी मानसी छत्तीसगढ़ में बनीं जज, दून में हुआ स्वागत
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दून से लॉ की पढ़ाई करने के बाद उत्तराखंड की बेटी मानसी बिष्ट ने छत्तीसगढ़ में जज बनकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। सोमवार को मानसी का उत्तरांचल विश्वविद्यालय में भव्य स्वागत किया गया।
कुलाधिपति जितेंद्र जोशी ने कहा, मानसी ने उपलब्धि से विवि के साथ-साथ पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणात्मक उदाहरण बनेगी। वहीं, लॉ कॉलेज के डीन व विवि के उपकुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा ने बताया, मानसी मूलरूप से चंपावत जिले के लोहाघाट की रहने वाली हैं। उनके माता-पिता स्कूल प्रधानाध्यापक हैं, जबकि भाई मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। मानसी पढ़ाई के साथ-साथ एक उत्कृष्ट खिलाड़ी भी हैं। मानसी वॉलीबाल की राष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं। राष्ट्रीय खेलों की डिस्कश थ्रो प्रतियोगिता में मानसी ने स्वर्ण और भाला फेंक में रजत पदक प्राप्त किया है।
इसके अलावा उन्होंने वॉलीबाल व एथलीट में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व भी किया है। मानसी ने कहा, सपना तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलना था। शिक्षकों के सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से जज का सपना भी पूरा हो गया। छात्रों को न्यायिक सेवा में सफलता के टिप्स देते हुए उन्होंने कहा, प्रारंभिक परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम से संबंधित बेयर एक्ट को बार-बार पढ़ना और वैकल्पिक प्रश्नों का अभ्यास करना आवश्यक है।
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कहा कि मुख्य परीक्षा के लिए लॉ के साथ-साथ भाषा, सामान्य ज्ञान व संबंधित राज्य की स्थानीय विधि की जानकारी होना भी जरूरी है। इस अवसर पर कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पूनम रावत, विभागाध्यक्ष डाॅ. राधेश्याम झा, मानसी की माता ममता बिष्ट, डाॅ. कमल पाण्डेय, कविता पाण्डेय आदि मौजूद रहे।
कुलाधिपति जितेंद्र जोशी ने कहा, मानसी ने उपलब्धि से विवि के साथ-साथ पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणात्मक उदाहरण बनेगी। वहीं, लॉ कॉलेज के डीन व विवि के उपकुलपति प्रो. राजेश बहुगुणा ने बताया, मानसी मूलरूप से चंपावत जिले के लोहाघाट की रहने वाली हैं। उनके माता-पिता स्कूल प्रधानाध्यापक हैं, जबकि भाई मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। मानसी पढ़ाई के साथ-साथ एक उत्कृष्ट खिलाड़ी भी हैं। मानसी वॉलीबाल की राष्ट्रीय खिलाड़ी रही हैं। राष्ट्रीय खेलों की डिस्कश थ्रो प्रतियोगिता में मानसी ने स्वर्ण और भाला फेंक में रजत पदक प्राप्त किया है।
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इसके अलावा उन्होंने वॉलीबाल व एथलीट में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व भी किया है। मानसी ने कहा, सपना तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए खेलना था। शिक्षकों के सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से जज का सपना भी पूरा हो गया। छात्रों को न्यायिक सेवा में सफलता के टिप्स देते हुए उन्होंने कहा, प्रारंभिक परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम से संबंधित बेयर एक्ट को बार-बार पढ़ना और वैकल्पिक प्रश्नों का अभ्यास करना आवश्यक है।
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कहा कि मुख्य परीक्षा के लिए लॉ के साथ-साथ भाषा, सामान्य ज्ञान व संबंधित राज्य की स्थानीय विधि की जानकारी होना भी जरूरी है। इस अवसर पर कॉलेज की प्राचार्य प्रो. पूनम रावत, विभागाध्यक्ष डाॅ. राधेश्याम झा, मानसी की माता ममता बिष्ट, डाॅ. कमल पाण्डेय, कविता पाण्डेय आदि मौजूद रहे।