उत्तराखंड: बारिश ने गर्मी से दी राहत, बदरीनाथ हाईवे खुला, 79 सड़कें अब भी नहीं खुल पाईं
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक राज्य के कुछ जिलों में तेज गर्जना के साथ बौछारें पड़ने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना है।
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राज्य में मैदान से लेकर पहाड़ तक अगले 24 घंटे आमजन के लिए भारी पड़ने वाले हैं। कारण कि मौसम विज्ञानियों ने जहां अगले 24 घंटे में राजधानी देहरादून के अलावा पौड़ी और नैनीताल जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। वहीं मौसम विभाग के अलर्ट के बीच शुक्रवार को दोपहर बाद देहरादून में झमाझम बारिश हुई। जिससे कई दिन से गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली।
वहीं टिहरी, चंपावत और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में भारी बारिश की संभावना है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक राज्य के इन जिलों के अलावा अन्य जिलों में तेज गर्जना के साथ बौछारें पड़ने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना है।
भारी बारिश की संभावनाओं को देखते हुए मौसम विभाग की ओर से शुक्रवार के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। ऐसे में भारी बारिश वाले जिलों में संबंधित जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से थोड़ा एहतियात बरतने की जरूरत है।
बदरीनाथ हाईवे मलबा आने से बंद
वहीं शुक्रवार की सुबह मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे बाधित हाे गया था। हाईवे पर श्रीनगर से करीब सात किमी दूर चमधार में मलबा आने से मार्ग बंद हो गया था, जिसे सुबह साढ़े दस बजे खोल दिया गया।
79 सड़कें अब भी बंद
मानसून सीजन में सड़कों को खुला रखना लेनिवि के लिए चुनौती रहेगा। मानसून की पहली बारिश ने 11 राष्ट्रीय राजमार्गों सहित कुल 1696 सड़कों को अवरुद्ध कर दिया था। प्रमुख अभियंता लोनिवि हरिओम शर्मा ने बताया कि 1617 सड़कों को खोल दिया गया है। अब केवल 79 सड़कें बंद हैं, जिन्हें खोलने का कार्य जारी है। इनमें से 42 सड़कें पीडब्ल्यूडी और 37 सड़कें पीएमजेएसवाई की हैं। पौड़ी जनपद में एक राज्य मार्ग कर्णप्रयाग-नौटी अभी भी बंद है। प्रमुख अभियंता ने बताया कि ऑल वेदर रोड के संभावित भूस्खलन वाले स्थानों पर अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भूस्खलन की स्थिति में मार्ग को खोलने के लिए मशीनों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अगले 24 घंटे में राज्य के मैदानी क्षेत्रों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
बता दें की मौसम विज्ञानियों ने 13 जून को मानसून के उत्तराखंड पहुंचने की भविष्यवाणी की थी और संभावना जताई थी कि मानसून की सक्रियता के साथ ही पहाड़ से लेकर मैदान तक जबरदस्त बारिश होगी। लेकिन मौसम विज्ञानियों की तमाम संभावनाओं को दरकिनार करते हुए मौसम ने जो करवट ली उसे देखकर मौसम विज्ञानी भी भौचक रह गए।
बता दें कि पिछले 15 दिनों में पहाड़ से लेकर मैदान तक न सिर्फ जबरदस्त गर्मी पड़ी, वरन मानसून की सक्रियता के बावजूद बारिश भी सिरे से नदारद रही। मौसम विज्ञानियों की ही मानें तो हाल के वर्षों में यह पहली बार है, जब मानसून की दस्तक देने के बावजूद लोगों को जबरदस्त गर्मी का सामना करना पड़ा और बारिश नहीं हुई।
राजधानी दून व आसपास इलाकों में पारा लगातार दूसरे दिन भी 35 पार
लगातार दूसरे दिन गुरुवार को भी पारा 35 डिग्री के पार पहुंच गया। जिसके चलते लोगों को जबरदस्त गर्मी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री दर्ज किया गया।
वैसे तो राजधानी दून और आसपास के इलाकों में दिन भर आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन तापमान अधिक होने की वजह से गर्मी से राहत नहीं मिली। अपराहन मौसम का मिजाज बदला और आसमान में काले घने बादल भी दिखे। एक बारगी लगा कि झमाझम बारिश होगी और गर्मी से राहत मिलेगी।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मौसम विज्ञानियों ने अगले 24 घंटे में देहरादून और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई है। इससे लोगों को गर्मी से जल्द राहत मिलेगी।
अस्पतालों में बढ़ी डायरिया, उल्टी, पेट दर्द के मरीजों की भीड़
पिछले 15 दिनों से पड़ रही जबरदस्त गर्मी का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है। दो दिनों के भीतर अधिकतम तापमान 35 डिग्री से अधिक होने के चलते कई लोगों को डायरिया, उल्टी और पेट दर्द जैसी बीमारियों ने गिरफ्त में ले लिया।
दून अस्पताल, कोरोनेशन जैसे सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों में डायरिया, उल्टी से पीड़ित मरीजों की भीड़ बढ़ी है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. केसी पंत के मुताबिक अस्पताल में बड़ी संख्या में डायरिया से पीड़ित मरीज आ रहे हैं।
ऐसे में लोगों को थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। बकौल डॉ. केसी पंत अत्यधिक गर्मी की स्थिति में डायरिया, पेट दर्द, उल्टी की शिकायतें बढ़ जाती हैं। इस मौसम में लोगों को अधिक से अधिक तरल पदार्थों के साथ ही खानपान में खास ध्यान देना होगा।