{"_id":"5fa1a16f28eb3f2f5b55be02","slug":"uttarakhand-september-and-october-month-transfer-by-former-pccf-now-canceled","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड: पूर्व पीसीसीएफ की ओर से सितंबर, अक्तूबर में किए गए तबादले निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड: पूर्व पीसीसीएफ की ओर से सितंबर, अक्तूबर में किए गए तबादले निरस्त
Tue, 03 Nov 2020 11:59 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 03 Nov 2020 11:59 PM IST
सार
- शासन ने जारी किया आदेश, शून्य सत्र में कार्मिक से अनुमति न लेने को बनाया आधार
- वन मंत्री ने सोमवार को जताई थी तबादलों पर आपत्ति
विज्ञापन
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हाल ही में सेवानिवृत्त हुए प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) जयराज की ओर से सितंबर और अक्तूबर में किए गए सभी तबादलों को शासन ने निरस्त कर दिया है। मंगलवार को प्रमुख वन सचिव आनंद वर्द्धन की ओर से यह आदेश जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
आदेश में कहा गया है कि जयराज की ओर से कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को बताए बिना ही तबादले कर दिए गए थे। अगस्त में ही आदेश जारी कर कहा गया था कि शून्य सत्र में बिना कार्मिक की अनुमति के तबादले न किए जाएं। ऐसे में सितंबर और अक्तूबर के तबादले निरस्त किए गए हैं।
विज्ञापन
सोमवार को इन तबादलों पर वन मंत्री हरक सिंह ने भी सवाल उठाया था। उनका कहना था कि तबादलों को निरस्त किया जाएगा। इसके लिए प्रमुख सचिव वन को आदेश दे दिया गया है। प्रमुख सचिव वन आनंद वर्द्धन का कहना था कि तबादले नियम विरुद्ध हुए तो निरस्त होंगे।
विज्ञापन
वन मंत्री को भी नहीं थी जानकारी
पूर्व पीसीसीएफ जयराज की ओर से किए गए तबादलों की जानकारी वन मंत्री हरक सिंह को भी नहीं थी। जयराज 31 अक्तूबर को सेवानिवृत्त हुए और इससे कुछ समय पहले हुई बैठक में हरक सिंह ने पूछा भी था कि ये तबादले किस आधार पर हुए, लेकिन उन्हें इसका जवाब नहीं मिला था।
इसके बाद इस मामले की शासन से शिकायत की गई थी। वन विभाग के कई अधिकारी अभी तक यही नहीं समझ पाए हैं कि ये तबादले हैं कौन-कौन से। माना जा रहा है कि कार्बेट और राजाजी सहित अन्य स्थानों से वन क्षेत्राधिकारियों सहित अन्य के तबादले किए गए थे। दूसरी ओर तबादलों को निरस्त करने में शासन ने भी खासी तेजी दिखाई है।