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Uttarakhand: अपनी हिम्मत से खुद को संभाला, फिर बनी महिला समूह का सहारा, पढ़िए जज्बे से भरी ये कहानियां

Sat, 08 Mar 2025 05:56 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 08 Mar 2025 05:56 PM IST
सार

अतंरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन महिलाओं की कहानी हम आपको बताते हैं, जिन्होंने समाज में उदाहरण पेश किया है। 

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Uttarakhand Rural Livelihood Mission Women empowerment got new momentum in 95 blocks of 13 districts of state
women's day - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राज्य के 13 जिलों के 95 ब्लॉक में महिला सशक्तीकरण को नई गति मिली है। मिशन के जरिये करीब पांच लाख महिलाएं आर्थिक तौर पर मजबूत हुई हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं सुदूर क्षेत्रों से आती हैं, जो मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों में स्वरोजगार करके अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं। देहरादून में सेतु आयोग के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचीं कुछ महिलाओं से महिला दिवस के मौके पर अमर उजाला ने बातचीत की।

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गांव से निकलकर जी-20 मंच तक पहुंचना सपने जैसा

जिला टिहरी में कीर्ति नगर ब्लॉक निवासी रंजना रावत खुशहाल स्वयं सहायता समूह से सितंबर 2020 से जुड़ी हैं। पहले खुद से आचार पापड़ वगैरह बनाती थीं, लेकिन मिशन से जुड़कर स्व रोजगार को विस्तार दिया। आज अन्य महिलाएं उनके समूह से जुड़़ी हैं। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण की शुरुआत 25 किलो से की थी, जो अब क्विंटल में होता है। उन्होंने बताया कि उनके लिए गौरव की बात है कि उन्हें अपने काम की पहचान की वजह से नई दिल्ली में जी-20 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मंच पर प्रतिभाग करने का मौका मिला, जो सपने जैसा था।

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दोना पत्तल के काम से शुरू किया कारोबार

उत्तराकाशी जिले के ब्लॉक चिन्याली सौड़ निवासी शशि घिड़ियाल ने बताया कि उनके पति की इलेक्ट्रॉनिक की छोटी दुकान थी, जो कोरोना काल में चलनी बंद हो गई। तब उन्होंने मिशन के जरिये एक राशन की दुकान खोली, उससे भी गुजारा मुश्किल हुआ तो मिशन के अधिकारियों ने उन्हें दोना पत्तल की मशीन दी। उससे उनका काम बढ़ गया। अब वह पति के साथ मिलकर दोना पत्तल का व्यवसाय करती हैं, मांग बढ़ने पर मनरेगा के तहत अन्य महिलाओं को रोजगार भी देती हैं। इस तरह अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दे पा रही हैं।

ग्राम प्रधान से महिला व्यवसायी बनीं

पौड़ी गढ़वाल निवासी साधना ने बताया कि ससुराल से सहयोग के चलते वह ग्राम प्रधान बनीं, फिर उन्हें आजीविका मिशन से जुड़ने का मौका मिला। उन्होंने लक्ष्य तय किया कि वह गांव की महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए कार्य करेंगी। पहले खुद फूड प्रोसेस का प्रशिक्षण लिया। अचार, सब्जी, मोटा अनाज, हल्दी व अदरक का उत्पादन किया। पांच साल के काम में आठ से दस महिलाएं उनके स्व रोजगार से जुड़ चुकी हैं।

हस्तशिल्प से संवारा कई महिलाओं का जीवन

तीलू रौतेली समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित नर्वदा रावत ने कहा कि महिलाओं को अपनी उन्नति के रास्ते खुद तलाशने होंगे। उन्होंने साल 2005 में नेहरू युवा कल्याण से हस्तशिल्प का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद हस्तशिल्प व हथकरघा के जरिये 25-25 महिलाओं के अलग-अलग समूह को प्रशिक्षित कर चुकी हैं। न सिर्फ हस्तशिल्प से स्व रोजगार कर रही हैं, बल्कि समूह की कई महिलाओं को सशक्त कर चुकी हैं।

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ग्रामीण आजीविका मिशन से महिला सशक्तीकरण को मिली नई गति

राज्य परियोजना प्रबंधक मेहजबी कुरैशी ने बताया कि मिशन के तहत राज्य में अब तक 66,672 स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया है, जिनके जरिये 4.90 लाख ग्रामीण परिवारों की महिलाएं संगठित और सशक्त हुई हैं। मिशन का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाना और उनकी आजीविका में सुधार करने के साथ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

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