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Dehradun News: नंबर वन हरियाणा से साइबर ठगी रिकवरी के गुर सीखेगी उत्तराखंड पुलिस

Mon, 06 Jan 2025 12:02 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2025 12:02 AM IST
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Uttarakhand police will learn the tricks of cyber fraud recovery from number one Haryana
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Iहरियाणा 36 फीसदी रिकवरी के साथ देश में है नंबर वन, उत्तराखंड में रिकवरी 13 फीसदी के आसपास
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Iपिछले पूरे साल में 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से उत्तराखंड पुलिस 28 करोड़ रुपये बचाने में हुई कामयाब
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I साइबर ठगी की रकम रिकवर कर पीड़ित को लौटाने में हरियाणा पुलिस देश में नंबर एक पर है। यहां करीब 36 फीसदी रकम 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से रिकवर कर ली जाती है। अब उत्तराखंड पुलिस अपने रिकॉर्ड को सुधारने के लिए हरियाणा से ही यह गुर सीखेगी। इसके लिए कुछ अधिकारी हरियाणा के पंचकुला स्थित कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली को देखने के लिए जाएंगे। ताकि, यहां भी अपने 13 फीसदी रिकवरी रेट को बढ़ाकर पीड़ितों की मदद की जा सके।
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Iबता दें कि पिछले साल 2024 में साइबर ठगों ने प्रदेश के लोगों से करीब 210 करोड़ रुपये ठगे हैं। इनमें बहुत से ऐसे लोग रहे जिन्होंने एक साथ तीन करोड़ या इससे ज्यादा भी साइबर ठगों के खातों में जमा कर दिए। इनमें से यदि समय पर किसी ने साइबर वित्तीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल किया तो पुलिस रकम बचाने में कामयाब भी रही।
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Iइस तरह करीब 28.12 करोड़ रुपये लोगों के बचाए भी गए। लेकिन, यह कुल ठगी गई रकम का लगभग 13 फीसदी है। हैरानी की बात यह है कि करीब दो साल पहले भी उत्तराखंड पुलिस का रिकवरी रेट लगभग इतना ही था। इसके साथ उत्तराखंड पुलिस का देश में शीर्ष 10 राज्यों में नंबर आता है। जबकि, हरियाणा पुलिस अपने विशेष प्रयासों से खुद को आठ फीसदी से 36 फीसदी पर ले आया है। अधिकारियों के मुताबिक वहां साइबर वित्तीय हेल्पलाइन 1930 का मॉडल देश में सबसे अच्छा माना जा रहा है। ऐसे में पिछले दिनों डीजीपी दीपम सेठ ने भी पुलिस अधिकारियों को इस मॉडल को परखने के निर्देश दिए थे।
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Iऐसा क्या किया हरियाणा पुलिस ने
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Iदरअसल, हरियाणा राज्य में कुछ ऐसी जगह भी हैं जहां से देशभर के लोगों के साथ ठगी की जाती थी। इनमें मेवात और नूह का नाम आता था। ऐसे में हरियाणा राज्य इन जगहों के कारण बदनाम भी हो रहा था। हरियाणा पुलिस ने भी सभी प्रदेशों के साथ 1930 हेल्पलाइन को शुरू किया था। मगर, इसमें बैठे पुलिसकर्मी उतना काम नहीं कर पा रहे थे जितना कि होना चाहिए था। ऐसे में उन्होंने अपने इस कॉल सेंटर में देश के प्रमुख बैंकों के कर्मचारियों को भी पुलिसकर्मियों के साथ ही तैनात कर दिया। अब जैसे ही किसी ठगी के शिकार व्यक्ति की कॉल आती है तो सबसे पहले बैंक खाते को देखा जाता है। संबंधित बैंक से यदि दूसरे बैंक में पैसा ट्रांसफर हुआ है तो वहीं बैठा उस बैंक का कर्मचारी उसे रोक देता है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि ज्यादा से ज्यादा रकम बचाई न जा सके। इस तरह हरियाणा का रिकवरी प्रतिशत बढ़ गया।
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Iये है सामान्य प्रक्रिया
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Iउत्तराखंड व अन्य प्रदेशों में केवल पुलिसकर्मी ही इन कॉल से डील करते हैं। कॉल आने पर संबंधित बैंक को मेल या फोन कर खातों की जानकारी दी जाती है। इस प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। देर होने के कारण ठग सारा पैसा बैंकों से निकाल लेते हैं और पुलिस के सामने हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं रह जाता।

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Iहरियाणा के मॉडल को देखने के लिए जल्द ही पुलिस अधिकारियों को भेजा जाएगा। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक ने भी निर्देश जारी किए थे। वहां जो बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं उनके आधार पर उत्तराखंड में भी व्यवस्था की जाएगी। -डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी कानून व्यवस्थाI
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